वंदना की हैट्रिक ने रचा इतिहास- महिला हॉकी टीम पहली बार ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में

वंदना की हैट्रिक ने रचा इतिहास- महिला हॉकी टीम पहली बार ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में
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टोक्यो (एजेंसी)। भारतीय महिला हॉकी टीम ने कमाल कर दिया। ओलंपिक इतिहास में पहली बार अपनी महिलाएं क्वार्टर फाइनल खेलेंगी। शनिवार को भारत के सामने दो चुनौतियां थी। पहले तो उसे ‘करो या मरोÓ के मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को हराना था फिर उम्मीद लगानी थी कि ग्रेट ब्रिटेन, आयरलैंड को हरा दे। शायद सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानियों की प्रार्थनाएं काम कर गई। अब क्वार्टर फाइनल में रानी रामपाल की टीम की टक्कर मजबूत ऑस्ट्रेलिया से 2 अगस्त (सोमवार को होगी।

4-3 से द. अफ्रीका को हराया

स्ट्राइकर वंदना कटारिया के ऐतिहासिक तीन गोल के बूते भारत ने निचली रैंकिंग वाली दक्षिण अफ्रीका टीम को 4-3 से हराकर तोक्यो ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश की उम्मीदें बरकरार रखी। वंदना ने चौथे, 17वें और 49वें मिनट में गोल किया। वह ओलंपिक के इतिहास में तीन गोल करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई। नेहा गोयल ने 32वें मिनट में एक गोल दागा। दक्षिण अफ्रीका के लिए टेरिन ग्लस्बी (15वां), कप्तान एरिन हंटर (30वां) और मेरिजेन मराइस (39वां मिनट) ने गोल दागे।

हम जीतने के लिए ही आए थे

भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच मारिन ने कहा, ‘प्रदर्शन में निरंतरता जरूरी है। टीम अगर क्वार्टर फाइनल में पहुंचती है तो वहां हालात एकदम अलग होंगे। कल हमने बहुत अच्छा खेला और फिर आज लगातार दूसरे दिन मैच खेलना था। हमारे बेसिक्स आज उतने सही नहीं थे जितने कि कल। हम जीतने के लिये ही आए थे। क्वार्टर फाइनल से नई शुरूआत होती है और पूल मैचों का प्रदर्शन मायने नहीं रखता। वहां अलग ही तरह का खेल होता है। अच्छी बात यह है कि हमारे लिए आखिरी दो मैच भी नॉकआउट की तरह ही थे।‘

भारतीय पुरूष टीम का आज क्वार्टर फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन से मुकाबला

आठ बार की ओलंपिक चैंपियन भारतीय हॉकी टीम ब्रिटेन के खिलाफ रविवार को जब क्वार्टर फाइनल में उतरेगी। ओलंपिक में भारत को आखिरी पदक 1980 में मॉस्को में मिला था जब वासुदेवन भास्करन की कप्तानी में टीम ने गोल्ड जीता था, उसके बाद से भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन में लगातार गिरावट आई और 1984 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में पांचवें स्थान पर रहने के बाद वह इससे बेहतर नहीं कर सकी। बीजिंग में 2008 ओलंपिक में टीम पहली बार क्वालीफाई नहीं कर सकी और 2016 रियो ओलंपिक में आखिरी स्थान पर रही। देश में हॉकी का ग्राफ लगातार नीचे चला गया। पिछले पांच साल में हालांकि भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन में जबरदस्त सुधार आया है, जिससे वह विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर पहुंची।


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