यूआईबी के सर्वे का दावा – जलवायु के लिए यूरोपीय लोग बदल रहे आदत

यूआईबी के सर्वे का दावा - जलवायु के लिए यूरोपीय लोग बदल रहे आदत
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अधिकतर लोग भोजन में मीट के इस्तेमाल में ला रहे कमी

उड़ानों पर भी अंकुश की बना रहे योजना

ब्रसेल्स (एजेंसी)। जलवायु परिवर्तन के भावी खतरों को ध्यान में रखते हुए यूरोपीय देशों में रहने वाले लोग एक अभिनव पहल शुरू करने जा रहे हैं। अपने भोजन में मांस के इस्तेमाल में कमी लाने के अलावा यहां के लोग विमानों के जरिये अपनी यात्राओं में भी कमी लाने की योजना बना रहे हैं।

यूरोपियन इनवेस्टमेंट बैंक (यूआईबी) के एक ताजा सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर यूरोपीय लोग जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए भोजन में मीट का इस्तेमाल तो कम कर ही रहे हैं। साथ ही अपनी यात्राओं के लिए उड़ानों की संख्या भी कम करने की योजना बना रहे हैं।

इस सर्वेक्षण में यूरोपियन यूनियन (ईयू) के 27 देशों के 27700 लोगों से सवाल-जवाब किए गए थे। 74 फीसद लोगों ने कहना है कि कोरोना के कारण लगे प्रतिबंध हटने के बाद वे पर्यावरणीय कारणों के चलते धीरे-धीरे अपनी यात्राओं के लिए विमानों के उपयोग में कमी लाएंगे। 43 फीसद लोगों ने कहा, वे ऐसा हमेशा करेंगे और 31 फीसद लोगों ने समय-समय पर ऐसी युक्तियां प्रयोग में लाने की इच्छा जताई। छोटी यात्राओं के लिए ट्रेनों के इस्तेमाल के संबंध में प्रश्न पूछे जाने पर 71 फीसद लोगों अपनी सहमति जताई है।

उल्लेखनीय है कि यूरोप का विमानन क्षेत्र एक ओर जहां कोरोना के कारण मंदी के संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर कार्बन उत्सर्जन के मामले में ग्राहकों और नियामकों की निगरानी में भी है। यह सर्वेक्षण बीते साल अक्टूबर-नवंबर के बीच किया गया था। इस दौरान 66 फीसद यूरोपीय लोगों ने कहा कि जलवायु पर्वितन के खतरों से बचने के लिए उन्होंने भोजन में मांस खाना छोड़ दिया है और 13 फीसद लोग जल्द ही ऐसा करने का योजना बना रहे हैं। इससे जैव-विविधता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

..ताकि ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से बचा सकें भविष्य

कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के चलते अन्य वर्षों की अपेक्षा 2020 में वैश्विक स्तर पर कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में काफी कमी आई थी। इसके बावजूद भी बीते साल रिकॉर्ड गर्मी हुई थी, जो यह रेखांकित करता है कि उत्सर्जन में और कमी लाने की जरूरत है ताकि भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से बचा जा सके।


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