Saturday , 23 June 2018
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‘यूआर’ की मेरिट को बताया ‘खुली मनमानी’

  • राजस्थान विश्वविद्यालय के मेरिट बनाने के तरीके को बताया सही
  • एक राज्य, एक सरकार, मेरिट बनाने के दो तरीके कैसे?

उदयपुर। एक ही राज्य में जब एक सरकार है तो दो विश्वविद्यालयों के मेरिट बनाने के तरीकों को आखिर कैसे व किस आधार पर जस्टिफाई किया जा सकता है? क्या वे अलग-अलग हो सकते हैं? यदि ऐसा नहीं है तो सर्वोच्च स्तर से दखल देकर सवाल क्यों नहीं पूछे जा रहे हैं। क्यों शिक्षामंत्री सहित अन्य जिम्मेदार लोग इसकी अनदेखी कर रहे हैं। मामला परीक्षार्थियों की नौकरी से जुड़ा है। ऐसे समय में जब प्वाइंट के अंतर से लोग नौकरियों से चूक जाते हैं। मेरिट को 12 प्रतिशत नीचे गिराना कहां तक मेधावी विद्यार्थियों के साथ न्याय है? जिनके जिम्मे पूरा सिस्टम हैं,उनकी चुप्पी अब कई सवाल उठाने लगी है? यहां बात हो रही है मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्याय की भर्ती परीक्षाओं में मनमानी की। शनिवार को कंप्यूटर साइंस और फार्मेसी में अतिरिक्त सूची जारी कर कुछ और परीक्षार्थियों को इंटरव्यू में शामिल होने का मौका दे दिया गया। विवि के रजिस्ट्रार ने अपने तर्कों के माध्यम से इसे सही ठहराने की कोशिश की है लेकिन शिक्षाविद इसे गलत परम्परा की शुरुआत बता रहे हैं। उनका कहना है कि राजस्थान विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया में कटऑफ सूची जारी करने का जो तरीका है, वहीं सुविवि में भी अपनाया जाना चाहिए। दोनों ही सरकारी विश्वविद्यालयों के वीसी की नियुक्ति भी भाजपा के ही शासनकाल में हुई है, ऐसे में यदि दो नियम काम में लिए जाते हैं तो ऐसा करना सरासर मनमानी ही कहा जाएगा। गलत है सुविवि की थ्योरीअसिस्टेंट प्रोफेसर में यूआर के पद की मेरिट को लेकर सुविवि रजिस्ट्रार की थ्योरी को कई शिक्षाविदों ने पूरी तरह से गलत बताया है। उनका कहना है कि राजस्थान विश्वविद्यालय ने जो पॉलिसी अपना रखी है उसमें यह है कि मसलन दो पोस्ट यूआर हैं, एक ओबीसी की। ऐसे में टॉप 20 परीक्षार्थियों को अनरिव्र्ड केटेगरी में रख लिया जाता है। उसमें से भी यदि कोई ओबीसी के कोई दो-तीन केंडीडेट हैं तो उन्हें ओबीसी के अन्य कुछ और परीक्षार्थियों को लेकर ओबीसी की नई मेरिट बना दी जाती है। अगर वेंकेसी है तो ऐसी ही मेरिट एसटी में भी बनाई जाती है। इसका जस्टिफिकेशन यह है कि यूआर में जो केटेगरी बनाई गई है अगर उसमें से किसी का सलेक्शन होता है तो वह यूआर श्रेणी में सलेक्टेड माना जाएगा और जो दूसरी लिस्ट से सलेक्ट हो रहा है, वह उसी केटेगरी में माना जाएगा। अब जहां तक सुविवि की बनाई गई लिस्ट का सवाल है तो इसमें टॉप-20 की ही लिस्ट बनाई जानी चाहिए, ना कि जनरल के 20 को कंसीडर करने के लिए लिस्ट को इतना नीचे तक ले जाए जाए कि उसमें 13 जने और जोडऩे पड़ जाएं। सुविवि का कहना है कि हम तो एसटी-एससी और ओबीसी को छोड़कर जो बचे हुए बीस हैं पहले उन्हें लेंगे, यह गलत है। सुविवि में कंप्यूटर साइंस में जो यूआर की पोस्ट है वह जनरल की नहीं है। उसे अपने हिसाब से इंटरप्र्रेट करना कहां तक उचित है? यूआर की पोस्ट है तो यूआर की ही मेरिट बनेगी। आप इसे जनरल की मेरिट कैसे बना सकते हैं? शिक्षाविद इसमें राज्यपाल महोदय से तत्काल दखल की भी मांग कर रहे हैं। इधर, एक और उदाहरण ज्योग्राफी का दिया जा रहा है। इसमें यूआर की मेरिट 73.1183 रखी हैं व ओबीसी की भी यही है। अब समान मेरिट के चक्कर में 29 का सलेक्शन किया गया है व इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है। ओबीसी में यदि किसी का सलेक्शन होगा तो वह कहेगा कि वह तो जनरल में ही आता है। ऐसे में ओबीसी में सलेक्शन किसका होगा? ऐसे ही एसटी में भी 68.8172 कटऑफ रखा है। इसमें से एकाध एसटी ऐसे हैं जो सामान्य से ऊपर जा रहे हैं तो उन्हें यूआर में क्यों नहीं अकोमोडेट किया गया है? कब बने यूआर के नियम ?
जानकारों ने पूछा है कि राजस्थान सरकार के यूआर के नियम क्या हैं? इसे कैसे डिफाइन किया गया है? यह तो ओपन फॉर ऑल है। इसे नॉन एसटी,एससी ओबीसी कैसे कहा जा सकता है? इस बारे में कोई ऑर्डर अब तक नहीं निकाला गया है, ना ही कोई राज्य सरकार का क्लेरीफिकेशन है। राजस्थान विवि ने रूल बहुत ही क्लियर किया है कि तीस मा मतलब तीस ही होता है। क्या रूल फ्रेम हुए, कहां पर रिजोल्यूशन लिया गया है यह विवि की वेबसाइट पर स्पष्ट किया जाए? सवाल यह भी उठ रहे हैं कि केवल चांस देने के लिए मेरिट को लंबा करना क्या उचित है?
अब एडिशन में होने वाली है बल्ले-बल्ले
सुविवि के शुभचिंत मूर्धन्य शिक्षाविदों का कहना है कि विवि भर्तियों के रूल एडमिशन में लागू करेगा तो छात्रों की बल्ले-बल्ले जा जाएगी। पहले जनरल के आधे छात्र छांटे जाएंगे व उसके बाद जहां तक मेरिट जाएगी वहां तक एसटी-एससी व ओबीसी के केंडीडेट लिए जाएंगे।भतीजी की केटेगरी बदलने के चर्चे
इधर, किसी विश्वविद्यालय में हो रही भर्तियों में ‘पृथ्वी को गोल बताने वाले किसी विषय मेंÓ एक रिटायर्ड प्रोफेसर की भतीजी के जनरल केटेगरी से पीएचडी करने मगर भर्ती परीक्षा का फार्म ओबीसी से भरने के रविवार को बड़े चर्चे रहे। लोग यह कंफर्म करने में जुटे रहे कि आखिर ऐसा कैसे हो गया है। यह गलती से हुआ है या फिर जानबूझकर।

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