यूएई – बहरीन का इजरायल के साथ ऐतिहासिक समझौता

यूएई - बहरीन का इजरायल के साथ ऐतिहासिक समझौता
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वॉशिंगटन (एजेंसी)। खाड़ी देशों और इजरायल के रिश्तों में मंगलवार को एक ऐतिहासिक मोड़ की शुरूआत हुई। वाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में हुए समारोह में यूएई और बहरीन ने इजरायल के साथ ऐतिहासिक समझौते पर दस्तखत किए। समझौते के तहत खाड़ी के इन दोनों प्रमुख देशों ने इजरायल के साथ रिश्तों को पूरी तरह सामान्य करते हुए उसे मान्यता दे दी है। समझौते को अब्राहम (या इब्राहीम) संधि का नाम दिया गया है।

नए मिडल ईस्ट का आगाज : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस ऐतिहासिक समझौते को ‘नए मिडल ईस्ट का आगाजÓ बताया है। उन्हें उम्मीद है कि इससे न सिर्फ पश्चिम एशिया में नई व्यवस्था का सूत्रपात होगा बल्कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए शबाब पर पहुंचे प्रचार के बीच उनकी छवि शांति लाने वाले एक नायक की होगी।

इजरायल को मान्यता देने वाले तीसरे और चौथे अरब देश बने यूएई, बहरीन

यूएई और बहरीन अब तीसरे और चौथे अरब देश हो गए हैं जिन्होंने 1948 में स्थापित हुए इजरायल को मान्यता दी है। दोनों देशों से पहले सिर्फ मिस्र और जॉर्डन ही ऐसे अरब देश थे जिन्होंने इजरायल को क्रमश: 1978 और 1994 में मान्यता दी थी। दशकों से ज्यादातर अरब देश इजरायल का यह कहते हुए बहिष्कार करते आए हैं कि जब तक फिलिस्तीन का विवाद हल नहीं हो जाता तब तक वे उसके साथ कोई रिश्ता नहीं रखेंगे।

फिलिस्तीनियों ने की निंदा, बताया खतरनाक विश्वासघात

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की अध्यक्षता में हुए समारोह में यूएई और बहरीन के प्रतिनिधियों ने अलग-अलग इजरायल के प्रतिनिधि के साथ समझौते पर दस्तखत किए। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा, यह दिन ऐतिहासिक है। यह शांति की नई सुबह का आगाज है। यूएई के विदेश मंत्री और वहां के ताकतवर क्राउन प्रिंस के भाई शेख अब्दुल्लाह बिन जायेद अल नाहयान ने कहा कि इससे दुनियाभर में उम्मीद की एक नई किरण जगेगी। बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्ला आतिफ अल-जायानी ने भी ऐतिहासिक समझौते का स्वागत किया और साथ में यह प्रतिबद्धता भी जताई कि उनका देश फिलिस्तीन के साथ खड़ा रहेगा। हालांकि, फिलिस्तीनियों ने इन समझौतों की निंदा करते हुए इसे खतरनाक विश्वासघात करार दिया है।


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