दो-तिहाई पंगोंग लेक पर चीन का कब्जा

दो-तिहाई पंगोंग लेक पर चीन का कब्जा
Share

गश्ती के लिए अब भारत खरीद रहा 12 हाई स्पीड बोट

नई दिल्ली (एजेंसी)। सीमा पर भारत और चीन के बीच अभी तनाव कम नहीं हुआ है। लद्दाख के दो-तिहाई पंगोंग लेक पर चीन ने कब्जा कर लिया है। अब भारत ने सीमा पर अपनी गश्ती बढ़ाने के लिए हाई स्पीड बोट खरीद रहा है। बीते शुक्रवार को सेना की तरफ से बताया गया है कि उन्होंने गोवा शिपयार्ड लि. के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किये हैं। जिसके बाद अब जल्दी ही सेना के पास 12 हाई स्पीड बोट मिलेंगे। इन बोट के जरिए लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी पेट्रोलिंग की जा सकेगी।

बताया जा रहा है कि 12 हाई स्पीड बोट आने में अगले 5 से 6 महीने का वक्त लग सकता है। संभावना है कि मई-जून तक सेना को यह सभी बोट मिल जाएंगे। चीन की सेना ने अपने कब्जे वाले अक्साई चीन इलाके में पिछले 30 दिनों में बड़े पैमाने पर सैनिकों को तैनात किया है। जिसको देखते हुए भारत ने भी पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील में निगरानी बढ़ाने के लिए हाई स्पीड गश्ती नौकाओं को खरीदने का फैसला किया है।

भारतीय सेना ने कुछ दिनों पहले ट्वीट कर कहा था कि उसने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित पैंगोंग झील समेत विभिन्न जलाशयों में निगरानी और गश्ती के लिए 12 हाई स्पीड गश्ती नौकाओं के लिए सरकारी कंपनी गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के साथ एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया है। सेना ने अपने ट्वीट कहा है कि ये आपूर्ति मई 2021 से शुरू हो जाएगी। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने एक स्टेटमेंट में कहा कि उसने अत्याधुनिक गश्ती नौका के लिए भारतीय सेना के साथ एक एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया है। इन नौकाओं में सुरक्षा बलों की जरूरत के अनुरूप विशेष उपकरण लगाए जाएंगे।

बोट में मशीनगन की व्यवस्था : मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बोट में मशीनगन की व्यवस्था होगी। इतना ही नहीं यह भी कहा जा रहा है कि यह स्वदेशी बोट चीन की बोट से काफी बेहतर और नई तकनीक से लैस होंगी। इन्हे स्पेशल स्टील और स्पेशल धातु से बनया जा रहा है। साथ ही अत्याधुनिक सर्विलांस और कम्युनिकेशन लगाए जा रहे हैं। इन्हे बनाने में सबसे ज्यादा मेहनत किया जा रहा है इनकी मजबूती पर ताकि चीन इन्हे टक्कर मार कर नुकसान न पहुंचा सकें। इसके लिये स्टील की मोटी प्लेटें भी लगाई जा रही हैं। नई बोट में जवानों के बैठने की भी ज्यादा जगहें होंगी। इन बोट में करीब 25-30 जवान एक साथ बैठ सकते हैं।

हालांकि कई रक्षा विशेषज्ञ यह मानते हैं कि भारत ने इन हाई स्पीड बोट के ऑर्डर देने में देरी कर दी है। सवाल उठ रहे हैं कि पिछले 8 महीने से जब चीन पैंगॉन्ग लेक के पास अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए हाई स्पीड बोट से गश्ती लगा रहा था तब भारतीय सेना क्या कर रही थी?


Share