Saturday , 23 June 2018
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Twitter : Suresh Goyal

  • कश्मीर के पत्थरबाजों का वही ईलाज है जो मेजर गोगोई ने किया… या फिर आक्रामक भीड़ पर गोलियां चलाओ…. जब तक यह नहीं होगा कितनी भी सर्जिकल स्ट्राइकें कर लो जनता के कलेजे के ठंडक नहीं पडऩे वाली…
  • …कम से कम बरसों से कुंडली मार बैठे वोरा को तो जम्मू कश्मीर के राज्यपाल पद से हटाओ और किसी दबंग रिटायर्ड सेना के अफसर को बिठाओ
  • राजनाथ? ….राम माधव? …रमजान के पवित्र माह में यदि मुसलमानों को हिंसा से परहेज नहीं तो हम क्यूं युद्ध विराम कर लाड़े की भुआ बन रहे हैं?
  • गौतम गंभीर की बात में दम है…. कश्मीर में जवानों की दुर्दशा समझने का एक ही तरीका है कि तमाम नेताओं को अपने परिवार सहित हफ्ते भर तक बिना किसी सुरक्षा के कश्मीर के गड़बड़ी वाले क्षेत्रों में रहने को कहा जाय….. जो एसा करे उसे ही 2019 का टिकट मिले
  • क्या 2019 भी 1971 होने वाला है जब करिश्माई इन्दिरा गांधी ने विपक्ष के महागठबंधन को पटखनी दे दी थी? ….कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि जनता के साथ मोदी की केमिस्ट्री भी इन्दिरा गांधी के जैसी ही है…. प्रदेश में भले ही वोट न दें मगर केन्द्र में तो मोदी को ही वोट देंगे…..
  • चन्द्राबाबू नायडू का देश हित में महान त्याग….. प्रधान मंत्री पद की दावेदारी से खुद को अलग किया…. अंगूर खट्टे?
  • दुम दबा कर वापस दड़बे में दाखिल…. 2013 में जिसे भ्रष्ट बताकर केजड़ीवाल ने चुनाव जीत वाहवाही लूटी अब उसी कांग्रेस पार्टी से गठजोड़ कर रहे…. मेडम शरणम् गच्छामि!
  • शिवलिंग पर जरा सा दूध चढाया तो गरीब बच्चों का कुपोषण याद आ गया…. अब दूध के टेंकर के टेंकर सड़कों पर उंडेले जा रहे मगर सबको सांप सूंघ गया…. इतने दोगलेपन के बावजूद भी यह सिर कैसे उठा पाते हैं? …. आमीर खान?
  • जिग्नेश मेवाणी? ….बंगाल में दो दलित युवकों की हत्या हो गई है…. मोमबत्ती जूलूस कब निकाल रहे हो?
  • वीरे दी वेडिंग चल निकली…. सोशल मीडिया पर एक मांग वाईरल…. पेट्रोल और गेस तो बाद में देख लेना, पहले बेंगन सस्ता करो…. लोग भी कमाल हैं! ….फिल्म बनाने वाले भी कम नहीं
  • म्यामनार, बंगलादेश के 7 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस लेने को तैयार… भारत के क्यूं नहीं?

2 comments

  1. न्‍यायालय द्वारा पटरखों पर लगाई गई रोक के लिए सरकार या प्रधानमंत्री को कैसे दोषी ठहरा सकते हैं।

  2. मनीष गुप्‍ता

    संघ के लोग देश के लिए कार्य करने को तत्‍पर है। स्‍वयंयेवक आवश्‍यक होने पर देश के लिए लडने को तैयार है। खुद के कार्यकर्ताअाेें के लिए सेना बनाने का आपका सुझाव अराजकता व नासमझी का परिचायक है। इसके लिए देश मे स्‍थापित व्‍यवस्‍था है, जिसका उपयोग संघ कर रहा है।

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