8वीं बोर्ड परीक्षा का टाइम टेबल बदला – रविवार को भी होगी परीक्षा

सीबीएसई की डेट शीट जारी -बोर्ड परीक्षाएं 4 मई से
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बीकानेर (कार्यालय संवाददाता)। राज्य में 8वीं बोर्ड की परीक्षाएं मई महीने में सुबह 8.30 से 11 बजे की शिफ्ट में होगी। परीक्षा के टाइम टेबल में भी बदलाव किया गया है। अब परीक्षा 5 मई से शुरू होगी। पहले 6 मई से शुरू होनी थी। दोपहर 2 से 4.30 बजे तक परीक्षा आयोजित करने का टाइम टेबल शिक्षा विभाग ने जारी किया था। मई में राज्य के कई शहरों का पारा 45 डिग्री को पार कर जाता है। ऐसे में तपती गर्मी में बच्चों की परीक्षा कराने पर विद्यार्थियों के परिजनों ने विरोध जताया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने परीक्षा समय में बदलाव किया है। शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर जानकारी भी दी है। 6 मई से ही माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की 10वीं व 12वीं कक्षा की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। बोर्ड ने पहले ही इन कक्षाओं का परीक्षा कार्यक्रम सुबह 8.30 बजे से 12.45 के बीच तय कर दिया था। ऐसे में शिक्षा निदेशालय ने इन्हीं तारीखों में 8वीं बोर्ड परीक्षा का समय दोपहर 2 बजे से 4.30 बजे कर दिया था। दोपहर की पारी में 10वीं व 12वीं के बच्चों को परीक्षा देनी होगी, जबकि सुबह की पारी में 8वीं बोर्ड के बच्चे परीक्षा देंगे।

टाइम टेबल भी बदला, रविवार को भी होंगे पेपर

शिक्षा विभाग ने 8वीं बोर्ड परीक्षा का टाइम टेबल भी पूरी तरह से बदल दिया। परीक्षा अब 6 की बजाए 5 मई से शुरू होगी। अंग्रेजी का पेपर पहले 6 मई को था। अब 5 मई को होगा। हिन्दी का पेपर पहले 11 मई को होना था लेकिन अब 9 मई रविवार को होगा। इसी तरह गणित का पहले 15 मई शनिवार को पेपर हो रहा था, जो अब 12 मई बुधवार को होगा। इसी तरह विज्ञान के पेपर में अब 11 दिन का अंतराल दिया गया है। पहले विज्ञान का पेपर 19 मई बुधवार को होना था। अब 24 मई सोमवार को होगा। वहीं सामाजिक विज्ञान का पेपर 22 मई शनिवार को हो रहा था। अब यह 28 मई शुक्रवार को होगा। इसी तरह तृतीय भाषा का पेपर पहले मंगलवार 25 मई को था लेकिन अब 29 मई को होगी।

करीब 12.5 लाख छात्र परीक्षा देंगे

आठवीं बोर्ड की परीक्षा में इस बार करीब 12.5 लाख बच्चे परीक्षा देंगे। परीक्षा राज्यभर में एक साथ आयोजित होगी और बच्चों को अपने स्कूल से अन्यत्र दूसरे सरकारी स्कूल में परीक्षा देने के लिए जाना होगा। छोटे बच्चों को यह परीक्षा देने के लिए अपने घर से दो से दस किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है। ऐसे में कई बच्चे बीमार भी हो जाते हैं। कोरोना काल में बच्चों के स्वयं के स्कूल में ही परीक्षा आयोजित करवाने की मांग भी उठती रही है।


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