वकीलों को विदेश से धमकी, एनआईए जांच की मांग

Threats to lawyers from abroad, demand for NIA investigation
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नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘सुरक्षा में चूक’ मामले को उच्चतम न्यायालय में उठाने के खिलाफ कई वकीलों के पास कथित धमकी भरे संदेश विदेश से भेजने का एक मामला सोमवार को सामने आया।

उच्चतम न्यायालय के वकीलों ने दावा किया है कि उनके मोबाइल फोन पर अंतरराष्ट्रीय नंबर से एक रिकॉर्डेड संदेश प्राप्त हुआ है, जिसमें कथित तौर पर शीर्ष अदालत में सुरक्षा के मुद्दे को उठाकर ‘मोदी शासन’ को मदद नहीं करने की अपील की गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने इस मामले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘सिख फॉर जस्टिस यूएसए’ द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एओआर (एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड) को भेजे गए ऑडियो को सावधानीपूर्वक लेना चाहिए। यह हरकत प्रचार से प्रेरित या दोषियों का बचाव करने के लिए एक धोखा हो सकती है। बावजूद इसके, यह उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों/ एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के लिए परोक्ष खतरा उत्पन्न करने वाला लगता है, इसलिए तत्काल इस मामले की एनआईए से जांच करवाई जानी चाहिए।

वकीलों ने यह भी दावा किया है कि मैसेज में पिछले सप्ताह पंजाब में प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान सड़क मार्ग को अवरूद्ध करने की जिम्मेदारी भी मैसेज भेजने वाले संगठन ने कथित रूप से ली है।

वकीलों का कहना है कि मैसेज में यह भी दावा किया कि 1984 सिख विरोधी दंगों के  मामले में उच्चतम न्यायालय की ओर से पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने इस मामले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘सिख फॉर जस्टिस यूएसए’ द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एओआर (एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड) को भेजे गए ऑडियो को सावधानीपूर्वक लेना चाहिए। यह हरकत प्रचार से प्रेरित या दोषियों का बचाव करने के लिए एक धोखा हो सकती है। बावजूद इसके, यह उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों/ एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड  के लिए परोक्ष खतरा उत्पन्न करने वाला लगता है, इसलिए तत्काल इस मामले की एनआईए से जांच करवाई जानी चाहिए। वकीलों ने यह भी दावा किया है कि  मैसेज में पिछले सप्ताह पंजाब में प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान सड़क मार्ग को अवरूद्ध करने की जिम्मेदारी भी मैसेज भेजने वाले संगठन ने कथित रूप से ली है।

वकीलों का कहना है कि मैसेज में  यह भी दावा किया कि 1984 सिख विरोधी दंगों के  मामले में उच्चतम न्यायालय की ओर से पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई थी।


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