बिहार चुनाव में ये तीन युवा खिलाड़ी करेंगे उलटफेर

बिहार चुनाव में ये तीन युवा खिलाड़ी करेंगे उलटफेर
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पटना (एजेंसी)। बिहार विधानसभा चुनाव इस बार कई मायने में अलग है। नई पीढ़ी के लोगों ने इस बार राजनीति में एंट्री ली है। इस बार बिहार में चुनावी मुकाबला ओल्ड वर्सेज न्यू में हैं। प्रमुख विपक्षी दल राजद ने भी अपने युवा तुर्क पर ही दांव लगाया है। वहीं, एलजेपी ने भी एनडीए से नाता तोड़ अपने चिराग के सहारे मैदान में कूद गई है। नेशनल शूटर श्रोयसी सिंह भी मैदान में पुराने नेताओं से दो-दो हाथ करने के लिए उतर गई हैं। तीनों बिहार की राजनीति में उभरते हुए चेहरे हैं। इन तीनों में 3 कॉमन बातें हैं।

तेजस्वी यादव, चिराग पासवान और श्रेयसी शुरूआत से राजनीति में एक्टिव नहीं रही हैं। तीनों पहले किसी न किसी दूसरे पेशे से जुड़े हुए थे। उसके बाद तीनों ने राजनीति में कदम रखा है। हां, तीनों का पारिवारिक बैकग्राउंड राजनीतिक जरूर रहा है। लेकिन शुरूआती पेशे में तेजस्वी और चिराग कुछ खास कमाल नहीं कर पाए है। उसके बाद पिता की राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए आगे आए हैं।

तीनों में पहली कॉमन बात

तीनों में पहली कॉमन बात यह है कि तीनों राजनीति से पहले किसी और पेशे में थे। तेजस्वी यादव पहले क्रिकेट खेलते थे। वह क्रिकेट में ही करियर बनाना चाहते थे। आईपीएल तक पहुंच गए थे लेकिन मैदान में खेलने का मौका नहीं मिला। क्रिकेट में आगे कुछ फ्यूचर उन्हें दिख नहीं रहा था। 2015 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी राजनीतिक मैदान में उतर गए। पिता के साथ 2014 के लोकसभा चुनाव से ही वह साथ नजर आने लगे थे।

वहीं, चिराग पासवान भी राजनीति से पहले बॉलिवुड में सक्रिय थे। उनकी कुछ फिल्में भी आई थीं। लेकिन वैसी सफलता नहीं मिली थी। चिराग पासवान ने भी 2014 में राजनीति में एंट्री मारी। जमुई सीट से लोकसभा चुनाव लड़े और जीतने में कामयाब हुए। 2019 में चिराग फिर मैदान में उतरे और चुनाव में जीत हासिल की।

श्रेयसी सिंह नेशनल शूटर हैं। श्रेयसी ने शूटिंग में अपना परचम लहाराया है। उन्होंने देश और राज्य का मान बढ़ाया है। अब उन्होंने राजनीति में एंट्री मारी है। अपनी मां के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है।

विरासत में मिली है राजनीति

तेजस्वी, श्रेयसी और चिराग में दूसरी कॉमन बात यह है कि तीनों को राजनीति विरासत में मिली है। तीनों के पिता राजनीति में कद्दावर नेता हैं। तेजस्वी बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के बेटे हैं। चिराग पासवान भी केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के बेटे हैं। रामविलास पासवान की गिनती बिहार में कद्दावर नेताओं के रूप में होती है। वहीं, श्रेयसी सिंह भी पूर्व केंद्रीय मंत्री और समता पार्टी के संस्थापक दिग्विजय सिंह की बेटी हैं।

तीनों के सामने है यह चुनौती

तेजस्वी और चिराग राजनीति में पहले ही कदम रख चुके हैं। श्रेयसी रविवार को भाजपा ज्वाइन की हैं। तीनों के सामने चुनौती यह है कि पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, खुद को राजनीति में स्थापित करें। श्रेयसी की सियासी पारी को आगे ले जाने में उनकी मां पुतुल सिंह मदद करेंगी। वहीं, चिराग और तेजस्वी को उनके पिता मदद कर रहे हैं। लेकिन इस बार दोनों मैदान में अकेले ही मोर्चा ले रहे हैं।

चिराग ने लिया बोल्ड फैसला

दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में चिराग पासवन ने एनडीए से नाता तोड़ा लिया है। चिराग पासवान ने नारा दिया है कि मोदी तुमसे बैर नहीं, नीतीश तेरी खैर नहीं। उन्होंने साफ कर दिया है कि हम जदयू के हर उम्मीदवार के खिलाफ हम मैदान में उम्मीदवार उतारेंगे। चिराग सीधे तौर पर अब बिहार में नीतीश कुमार को ललकार रहे हैं। ऐसा पहली बार है, चिराग पिता के बिना चुनावी मैदान में मोर्चा संभाले हुए हैं।

तेजस्वी भी कर रहे मुकाबला

2020 का चुनाव तेजस्वी के करियर के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है। तेजस्वी की लॉन्चिंग 2015 में हुई थी। उस वक्त पिता लालू यादव उनके साथ थे। महागठबंधन की सरकार में तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री भी थे। इस बार वह मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। महागठबंधन उनके चेहरे पर चुनाव लड़ रही है। लेकिन इस बार लालू यादव उनके साथ नहीं हैं। ऐसे में तेजस्वी को यह लड़ाई अपने बूते पर ही लडऩी है और खुद को साबित करना है।

श्रेयसी भी पहली बार मैदान

श्रेयसी के पिता दिग्विजय सिंह और मां पुतुल देवी भी सांसद रही हैं। इस बार के चुनाव में श्रेयसी खुद के चेहरे पर लोगों से वोट मांगने जाएंगी। जमुई विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लडऩे की चर्चा है। वहां उनका मुकाबला पुराने घाघ नेताओं से होगा। ऐसे में श्रेयसी की सियासी पारी के लिए यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण है।


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