देश में खाद्य तेल की नहीं होगी कमी – कृषि मंत्री ने की 11000 करोड़ की घोषणा

देश में खाद्य तेल की नहीं होगी कमी - कृषि मंत्री ने की 11000 करोड़ की घोषणा
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नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट और सीसीईए की बैठक में नेशनल पाम ऑयल मिशन को मंजूरी दे दी गई है। नेशनल पाम मिशन पर 11,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि देश में अब भी पाम ऑयल की खेती हो रही है, लेकिन अब इसे बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि खाने के तेल के भाव में उतार-चढ़ाव की वजह से छोटे किसानों के लिए पाम की खेती फायदेमंद नहीं थी। अब केंद्र सरकार नेशनल एडिबल ऑयल मिशन शुरू कर रही है। भारत में खाने के तेल की खपत में सालाना 3 से 3.5 फीसदी वृद्धि का अनुमान है।

नेशनल पाम मिशन का उद्देश्य

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि नेशनल पाम ऑयल मिशन का मुख्य उद्देश्य किसानों को पाम की खेती के लिए सुनिश्चित व्यवहारिक मूल्य प्रदान करना है। अगले 5 साल में 11,040 करोड़ के निवेश से पाम आयल मिशन उत्तर-पूर्वी राज्यों में 3.28 लाख हेक्टेयर और शेष भारत में 3.22 लाख हेक्टेयर में चलाया जाएगा। देश में पाम ऑयल पौधारोपण कार्यक्रम के तहत 6.5 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को शामिल किया जा सकता है।

रबी की फसल को बढ़ावा देने के प्रयास

तोमर ने कहा, रबी सीजन के वक्त हमने अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों को लोगों के बीच वितरित किया, जिससे उत्पादन और रकबे में बढ़ोतरी हुई, लेकिन अब भी हमें अपनी आपूर्ति के लिए तेल आयात करना पड़ता है। इसमें बड़ा हिस्सा पाम ऑयल का है। देश के कुल तेल आयात का 56 प्रतिशत हिस्सा पाम ऑयल का होता है। आईसीएआर ने बताया था कि 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पाम ऑयल की खेती की जा सकती है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा पूर्वोत्तर में है।

पांच साल का इंतजार

तोमर ने कहा कि छोटे किसान के लिए पाम की खेती मुश्किल है क्योंकि फसल लगाने के 5 और पूरी तरह से 7 साल बाद पैदावार मिलती है। इसके अलावा दाम के उतार चढ़ाव के कारण भी छोटे किसानों के लिए पाम की खेती चुनौतीपूर्ण है। देश के 12 राज्य में पाम की खेती होती है। पाम की खेती में किसान को नुकसान नहीं हो इसके लिए आयल पाम मिशन शुरू किया गया है।

किसान को डीबीटी

नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि पाम के भाव को लेकर सरकार ने एमएसपी जैसी सुविधा बनाई है। अगर बाजार में पाम के भाव गिर गए तो किसानों को केंद्र सरकार डीबीटी के माध्यम से सीधे पैसे मुहैया कराएगी। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए 5 करोड़ रूपये की सहायता दी जाएगी।

कैबिनेट के बड़े फैसले

पूर्वोत्तर में पाम आयल से संबंधित उद्योग लगाने के लिए पांच करोड़ तक की मदद मिलेगी। नेशनल पाम मिशन वास्तव में 11,000 करोड़ की योजना है। देश भर में किसानों को दिए जाने वाले मदद में केंद्र-राज्य की 60:40 की हिस्सेदारी होगी, जबकि पूर्वोत्तर में 90:10 का अनुपात होगा। इस समय देश में 3.5 लाख हेक्टेयर में पाम की खेती होती है जिसे बढ़ाकर 10 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य है। पाम की खेती के लिए मदद 12,000 प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 29,000 रूपये की जा रही है।


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