गणतंत्र दिवस पर नहीं होगा कोई मुख्य अतिथि

गणतंत्र दिवस पर नहीं होगा कोई मुख्य अतिथि
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टूटेगा 55 साल का रिकॉर्ड

नई दिल्ली ( एजेंसी )| भारत के 72वें गणतंत्र दिवस पर इस साल किसी भी देश के राष्ट्रपिता मुख मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद नहीं होंगे। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा है कि कोरोना वायरस के कारण इस साल के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में किसी विदेशी राष्ट्र प्रमुख या सरकार के मुखिया को आमंत्रित नहीं करने का निर्णय लिया गया है। पिछले 55 साल में यह पहला मौका होगा जब भारत का गणतंत्र दिवस बिना मुख्य अतिथि के मनाया जाएगा।

बोरिस जॉनसन ने कोरोना के कारण किया था इंकार

इस साल भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के लिए ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को मुख्य अतिथि बनाया गया था, लेकिन उन्होंने अपने देश में कोरोना से बिगड़ते हालात के कारण दौरे को रद्द कर दिया था। ऐसे समय में जब पूरी कोरोना महामारी से निपट रही है तो किसी ने राष्ट्रध्यक्ष या शासन के प्रमुख को निमंत्रित करना भी आसान कार्य नहीं था। ऐसे में सरकार ने इस साल बिना किसी मुख्य अतिथि के गणतंत्र दिवस मनाने का निर्णय लिया

1966 में भी गणतंत्र दिवस पर नहीं था कोई मुख्य अतिथि: इससे पहले 1966 में भी भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के ताशकंद में हुए निधन के कारण किसी को निमंत्रित नहीं किया गया था। संविधानिक जरूरतों के हिसाब से इंदिरा गांधी ने गणतंत्र दिवस से दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इस साल भारत में बहुत सादगी के साथ अपना गणतंत्र दिवस मनाया था।

पुरानी है गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के परंपरा:

हर साल गणतंत्र दिवस पर किसी ने किसी राष्ट्राध्यक्ष  या राष्ट्र प्रमुख को मुख्य अतिथि के रुप में आमंत्रित किया जाता है। यह परंपरा संविधान के लागू होने के साथ ही शुरू हो गई थी। हालांकि बाद में कई साल तक किसी मुख्य अतिथि को आमंत्रित नहीं किया गया। विशेष रणनीति के तहत राजनीतिक और आपसी संबंधों के आधार पर ही गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि का चुनाव किया जाता है।

पहली बार कौन बने थे मुख्य अतिथि: पहली बार 1950 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो 26 जनवरी पर मुख्य अतिथि के रुप में पधारे थे। उसके बाद 1954 में भूटान के राजा जिग्मे डोरजी मुख्य अतिथि बने थे। 1955 में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल गुलाम मोहम्मद मुख्य अतिथि थे।


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