अलगाववाद के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा श्रीनगर पुलिस का जज्बा

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श्रीनगर (एजेंसी)। कश्मीर के माहौल में बदलाव का असर साफ नजर आने लगा है। जगह-जगह लहराते राष्ट्रध्वज और विभिन्न होर्डिंग में तिरंगे की तस्वीरें जनभावनाओं को व्यक्त कर रही हैं। राष्ट्रवाद और मुख्यधारा में शामिल होने की भावना से पुलिस भी अछूती नहीं है। श्रीनगर पुलिस ने ट्विटर पर अपने नाम में शुक्रवार को लालचौक स्थित ऐतिहासिक घंटाघर के शिखर पर लहराते तिरंगे की तस्वीर को शामिल किया है। बता दें कि श्रीनगर स्थित लालचौक पिछले 30 वर्षों से राष्ट्रवाद और आतंकवाद, अलगाववाद के बीच प्रतिष्ठा का सवाल बना रहा था। कहा जाता है कि घंटाघर पर जिसका झंडा होता है, उसका ही यहां श्रीनगर में दबदबा होता है। ऐसे में श्रीनगर पुलिस का यह कदम अलगाववाद के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा।

पिछले 74 वर्षों में यह पहला अवसर है, जब जम्मू-कश्मीर पुलिस की किसी विंग या किसी जिला पुलिस ने अपने प्रतीक चिह्न अथवा लोगो में इस तरह से राष्ट्रध्वज को शामिल किया हो। पांच अगस्त, 2019 से पूर्व कश्मीर में आतंकियों और अलगाववादियों के डर से कोई सार्वजनिक रूप से राष्ट्रध्वज नहीं फहराता था। राष्ट्रध्वज सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी को ही घाटी में सरकारी इमारतों या कुछ अन्य स्थानों पर कुछेक लोग ही फहराते नजर आते थे। इसके विपरीत कश्मीर में आए दिन अलगाववादियों और आतंकियों के समर्थक पाकिस्तानी झंडे लेकर गली-बाजारों में निकल आते थे। उनके डर से आम लोग भी पाकिस्तानी झंडा उठाकर भीड़ का हिस्सा बन जाते थे। लोग आतंकियों व अलगाववादियों के फरमान पर स्वतंत्रता दिवस समारोह से भी दूर रहते और राष्ट्रध्वज को थामने से बचते थे। मगर अब परिस्थितियां बदल गई हैं। घाटी के विभिन्न इलाकों में आमजन अब अपने-अपने स्तर पर तिरंगा रैलियां निकाल रहे हैं। सभी सरकारी इमारतों और कार्यालयों में राष्ट्रध्वज लहराया जा रहा है। लोगों में इसी भावना को जगाने के लिए श्रीनगर पुलिस ने भी शहर में विभिन्न जगहों पर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं जनता को भेंट करते हुए होॄडग्स लगाए हैं। इन होॄडग्स और अपने ट्विटर हैंडल में श्रीनगर पुलिस ने लालचौक के घंटाघर को शामिल किया है और उसके शिखर पर तिरंगा भी है।

कश्मीर मामलों के जानकार शब्बीर ने कहा कि आज से तीन साल पहले तक श्रीनगर में इस तरह चारों तरफ होर्डिंग्स में तिंरगे की कल्पना नहीं की जा सकती थी। अगर कहीं ऐसा होर्डिंग होता तो उसे कब कौन फाड़ गया, पता नहीं चलता था। पुलिस ने जिस तरह से घंटाघर के शिखर पर तिरंगे को अपने लोगो में शामिल किया है उससे यह साबित होता है कि कश्मीर से अलगाववाद व राष्ट्रविरोधी तत्वों का प्रभाव खत्म हो गया है। अब यहां सिर्फ हिंदुस्तान का झंडा और नारा चलेगा।


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