बिना कटारिया की सहमति के बैठक में नहीं आ सकता था एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव

निगम में एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव पास, महापौर ने कहा अच्छा प्रस्ताव, मैंने ही डिजाइन बनाई थी
Share

उदयपुर. नगर संवाददाता & नगर निगम में बुधवार को जिस तरह से एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया इसके बाद से ही शहर में चर्चा का विषय बन गया है। इधर निगम के नेताओं में इस बात को लेकर चर्चा है कि यह मामला गुलाबचंद कटारिया की सहमति के बिना निर्माण समिति की बैठक में नहीं आ सकता है क्योंकि इस एलिवेटेड़ रोड के लिए कटारिया ही दिल्ली जाकर केन्द्र सरकार से पैसा स्वीकृत करवा सकते है और एलिवेटेड रोड का निर्माण कटारिया के लिए एक ओर बड़ी उपलब्धि हो सकती है।

नगर निगम की निर्माण समिति अध्यक्ष ताराचंद जैन ने बिना ऐजेन्डे में लिखे मुद्दे के अतिरिक्त जाकर एलिवेटेड रोड निर्माण का प्रस्ताव रखा पारित भी करवा दिया। बैठक में मौजूद सभी समिति सदस्य एक बार तो हैरान रह गए क्योंकि इतना बड़ा प्रस्ताव बैठक के ऐजेन्डे में शमिल नहीं किया था और अचानक से ताराचंद जैन ने यह प्रस्ताव रख दिया। इस पर सभी समिति सदस्यों ने अपनी सहमति दे दी। इधर इस मुद्दे को लेकर गुरूवार को शहर में और नगर निगम में जबरदस्त चर्चा विषय बना रहा।

शहर में इस बात को लेकर चर्चा है कि पहले शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया ने एलिवेटेड रोड बनाने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय भी व्यापारी विरोध में आ गए थे और उच्च न्यायालय की शरण में चले गए थे, जहां से उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।

ऐसे में शहर में यह चर्चा है कि बिना नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की सहमति के यह मुद्दा बैठक में नहीं आ सकता था और प्रस्ताव पारित नहीं हो सकता था क्योंकि जब ताराचंद जैन ने यह प्रस्ताव रखा तो उस समय महापौर जीएस टांक स्वयं वहां पर मौजूद थे और मुद्दा रखने के दौरान महापौर टांक और ताराचंद जैन के हाव-भाव को देखकर ऐसा लग रहा था कि मानों दोनों इस मुद्दे पर पहले चर्चा कर चुके है और पूरी तैयारी के साथ आए हो ताकी यदि कोई विरोध हो तो उसे निपटाया जा सकें। क्यूंकि ताराचंद जैन द्वारा मुद्दा रखते ही सबसे पहले अपनी सहमति भी महापौर जीएस टांक ने ही दी थी।

ऐसे में शहर में यह चर्चा है कि बिना कटारिया से चर्चा किए और कटारिया की सहमति के बिना निर्माण समिति अध्यक्ष ताराचंद जैन यह मामला कभी भी नहीं रख सकतें है। निगम में इस बात की भी चर्चा है कि बजट के लिए यदि केन्द्र के पास जाना भी पड़ा तो कटारिया इस इस रोड के आसानी से केन्द्रीय मंत्री नीतिन गडकरी के पास जाकर बजट ला सकते हैं क्योंकि कटारिया पूर्व में इस एलिवेटेड रोड के लिए 180 करोड का बजट लाए थे। ऐसे में यदि वर्तमान में एलिवेटेड रोड के लिए यदि बजट 200 करोड से उपर का भी लाना हो तो कटारिया के लिए आसान है और यदि एक बार एलिवेटेड रोड का काम शुरू हो भी जाता है तो भी कटारिया के खाते में यह एक ओर बड़ी उपलब्धि होगी।

डिजाईन तैयार; जरूरत है बजट की

महापौर जीएस टांक ने इस एलिवेटेड रोड की डिजाईन खुद ही बनाई थी और अभी यह डिजाईन तैयार है। यह भी माना जा रहा है कि इस एलिवेटेड रोड को लेकर जो भी उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया था, उसका अध्ययन भी करवाया जा चुका है। ऐसे मेें शहर में यह चर्चा है कि एलिवेटेड रोड को लेकर दिए गए उच्च न्यायालय के फैसले को लेकर विधिक राय लेकर उच्च न्यायालय के निर्णयानुसार काम करवाया जा सकता है।

महापौर-ताराचंद बाद में भी कर चुके है चर्चा

इस प्रस्ताव को पारित करने से पहले और बाद में भी महापौर जीएस टांक और निर्माण समिति अध्यक्ष ताराचंद जैन दोनों चर्चा कर चुके है। बैठक के तुरन्त बाद महापौर जीएस टांक और निर्माण समिति अध्यक्ष ताराचंद जैन दोनों अभियंता हरिश त्रिवेदी के पिता के निधन पर उनके निवास पर शोक व्यक्त करने गए थे, इस दौरान महापौर की सरकारी गाड़ी में दोनों अकेले ही थे।

शहर में बड़े कामों के लिए ही महापौर बनाया टांक को

शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया ने जीएस टांक को महापौर ही इसलिए बनाया कि शहर में निर्माण के बड़े काम हो, जिससे शहर की विभिन्न समस्याओं से निजात मिले। इसी कारण टांक को महापौर बनाया था, हालांकि महापौर ने दो ओवर ब्रिज के साथ-साथ स्मार्ट रोड का काम शुरू करवाकर कटारिया की मंशा को पूरा किया है, लेकिन एलिवेटेड रोड बनने से महापौर के कार्यकाल का भी एक मील का पत्थर होगा।

समिति के ऐजेन्डे में होता तो विरोध हो जाता

आम तौर निगम की किसी भी समिति की बैठक से पहले सदस्यों के पास एक ऐजेन्डा जाता है और उसमें बैठक में जो भी प्रस्ताव पारित करवाए जाने है उनका हवाल दिया होता है, लेकिन ऐलिवेटेड़ रोड जैसा बड़ा प्रस्ताव निर्माण समिति की बैठक के ऐजेन्डे में नहीं था। इसको लेकर निगम में चर्चा है कि यदि यह प्रस्ताव समिति की बैठक के ऐजेन्डे में होता तो बैठक में विरोध और हंगामा हो सकता था। इसी कारण अध्यक्ष की सहमति से अन्य प्रस्ताव वाले कॉलम के आधार पर इसे ताराचंद जैन ने रखा था।


Share