आईपीएल से वनडे की रफ्तार 7-8 गुना तक बढ़ी, आईपीएल आने के बाद 14 साल में 15 वनडे में 400+ रन, पहले 37 साल में 5 बार ही ऐसा हुआ

The pace of ODIs increased by 7-8 times from IPL, 400+ runs in 15 ODIs in 14 years after IPL, this happened only 5 times in first 37 years
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मुंबई (कार्यालय संवाददाता)। 2008 में शुरू हुई इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से क्रिकेट में आक्रामक बदलाव आया। आईपीएल के 15 साल में टी-20, वनडे से लेकर टेस्ट क्रिकेट भी तेजी से बदला। आईसीसी ने पिछले 4 सालों में 925 इंटरनेशनल टी-20 मैच करा दिए, जबकि 2005 से 2018 तक 636 टी-20 इंटरनेशनल ही हुए थे। पहला टी-20 मैच 2005 में खेला गया था। आईपीएल के आने के बाद वनडे क्रिकेट में बड़े स्कोर चेज होने लगे। 400 से ज्यादा का स्कोर 15 बार हासिल हुआ। जबकि इससे पहले वनडे के 37 साल के इतिहास में यह स्कोर सिर्फ 5 बार ही बना था। वनडे की मौजूदा रफ्तार से 35 सालों में 400+ का स्कोर 37-38 बार बन जाएगा। इस आंकड़े को पैमाना मानें तो कहा जा सकता है कि आईपीएल ने वनडे की रफ्तार करीब 7-8 गुना बढ़ा दी है।

टेस्ट टीमों का फोकस भी अब ड्रॉ की जगह रिजल्ट पर होने लगा है। इससे दर्शक भी मैदान में पहुंचकर टेस्ट क्रिकेट देखने लगे।

वनडे क्रिकेट : 2007 से पहले सिर्फ 5 बार 400+ बने, उसके बाद 15 बार ऐसा हुआ

1971 से 2007 तक 5 बार 400+ का स्कोर बना। 26 बार 350+ रन बने। 42 बार लक्ष्य का पीछा करते हुए 300 से ज्यादा रन बने। 23 बार 300+ रनों का लक्ष्य हासिल हुआ। हाईएस्ट स्कोर रहा 443/9, (श्रीलंका बनाम नीदरलैंड)। 2008 के बाद 15 बार 400 से ज्यादा रन बने। 91 बार 350+ रन बने। 123 बार लक्ष्य का पीछा करते हुए 300 से ज्यादा रन बने। 76 बार 300 से ज्यादा का टारगेट हासिल हुआ। हाईएस्ट स्कोर : 481/6, (इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया)।

टेस्ट क्रिकेट : आईपीएल के कारण नहीं मिल पा रहे स्पेशलिस्ट बल्लेबाज

2008 के बाद टेस्ट टीम में 45 खिलाडिय़ों ने डेब्यू किया। इनमें भी गिने-चुने खिलाड़ी ही अपनी जगह पक्की करने में सफल रहे। एक्सपर्ट्स का कहना है- कोहली ने जब टेस्ट कप्तानी छोड़ी, तब टीम के पास कप्तान के रूप में परमानेंट विकल्प मौजूद नहीं था। रोहित को कप्तान बनाया गया, जो कुछ साल पहले तक टेस्ट टीम में जगह पक्की करने तक के लिए जूझ रहे थे। विशेषज्ञ बल्लेबाजों के लिए रणजी खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

विस्फोटक हो रहा पेस अटैक :  140+ गेंद फेंकने वाले 5 से ज्यादा विकल्प कई तेज गेंदबाज आईपीएल के जरिए ही जगह बनाने में कामयाब रहे। 140+ की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले 5 से ज्यादा विकल्प टेस्ट टीम के पास मौजूद हैं। इनमें बुमराह, सिराज, नटराजन जैसे गेंदबाज आईपीएल से ही टीम में जगह बना सके। टेस्ट टीम में शमी, इशांत, उमेश यादव जैसे पेसर भी हैं। वहीं, अब उमरान, अर्शदीप, आवेश खान, हर्षल पटेल और नवदीप सैनी जैसे तेज गेंदबाज लगातार अपनी छाप छोड़ रहे हैं।

टी-20 इंटरनेशनल : 14 साल में 155 बार 200+ स्कोर बना, 23 बार चेज भी कर लिया गया

टी-20 इंटरनेशनल में 2005 से 2007 तक 10 बार 200 से ज्यादा रन बने थे। इनमें, एक ही बार 200 से ज्यादा का टारगेट हासिल हुआ था। वहीं, 2008 से अब तक 155 बार 200 से ज्यादा का स्कोर बना। 23 बार टीमों ने 200 से ज्यादा के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल भी किया।

टी-20 क्रिकेट पर बढ़ा आईसीसी का फोकस

दुनियाभर में पूरे साल टी-20 क्रिकेट की लीग होती रहती हैं। आईसीसी ने भी हर साल होने वाले टी-20 इंटरनेशनल को बढ़ावा दिया। 2019 से अब तक 925 टी-20 इंटरनेशनल खेले जा चुके हैं। जबकि, 2005 से 2018 तक 636 मैच ही हुए थे।

खिलाडिय़ों के संन्यास लेने की उम्र बढ़ी

आईपीएल आने के बाद भारतीय टीम में संन्यास लेने वाले खिलाडिय़ों की औसत उम्र 36 साल हो गई। 35 साल के 21 खिलाड़ी और 35 से कम उम्र के 11 खिलाडिय़ों ने 2008 के बाद संन्यास लिया। 2008 के पहले संन्यास लेने वाले खिलाडिय़ों की औसत उम्र 33 साल सामने आई। एक्सपर्ट्स के अनुसार, आईपीएल में खिलाडिय़ों को 14 मैच खेलने होते हैं। टीमें फिटनेस पर काम करती हैं। लीग में इंटरनेशनल से संन्यास ले चुके खिलाडिय़ों पर कम ही ध्यान दिया जाता है। ऐसे में अब भारतीय खिलाडिय़ों के संन्यास लेने की उम्र बढ़ गई है।

पाकिस्तान, अफगानिस्तान, वेस्टइंडीज व बांग्लादेश की टीम एक भी बार 400 के स्कोर को नहीं छू पाई है।


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