मीठू के जीवन की सबसे अनकही कहानी, प्रिंसेस ऑफ डूंगरपुर नहीं बन सकीं लता

The most untold story of Mithu's life, Lata could not become the Princess of Dungarpur
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मुंबई (कार्यालय संवाददाता)। लता मंगेशकर नहीं रहीं। रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उनका निधन हो गया। लता मंगेशकर भारत में किवदंतियों की तरह रहीं।  ‘स्वर कोकिला’ देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बड़ी आत्मीयता से ये उपाधि लता मंगेशकर को दी थी। लेकिन लता को जिस टाइटल की सबसे ज्यादा चाहत थी वो थी ‘प्रिंसेज ऑफ डूंगरपुर।‘ वही डूंगरपुर जो राजस्थान की एक रियासत थी। प्रसिद्ध क्रिकेटर और भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर रहे राजसिंह डूंगरपुर के साथ लता के खास रिश्तों की चर्चा सोशलाइट और संगीत की दुनिया में बड़े अदब के साथ की जाती है।

बीकानेर की राजकुमारी राज्यश्री, जो डूंगरपुर की बहन की बेटी हैं, अपनी आत्मकथा ‘पैलेस ऑफ क्लाउड्स- ए मेमॉयर’ में लिखती हैं कि दोनों की मुलाकात क्रिकेट के लिए दीवाने लता के भाई हृदयनाथ मंगेशकर के जरिए हुई थी। हृदयनाथ मंगेशकर और डूंगरपुर में दोस्ती थी, फिर इसी दोस्ती में लता की एंट्री हुई और उनकी मुलाकात राज सिंह डूंगरपुर से हुई। इस रिश्ते पर न सिर्फ डूंगरपुर के शाही घराने की नजर टेढ़ी थी बल्कि डूंगरपुर खानदान से जुड़े दूसरे राज परिवार भी इस रिश्ते को वो मुकाम नहीं दे पाए, जिसका ये हकदार था।

डूंगरपुर घराने की कहानी बताएं तो राजसिंह डूंगरपुर इस रियासत के महाराजा के तीसरे पुत्र थे। उनकी तीनों बहनों की शादी शाही परिवारों में हुई थी और उम्मीद की जा रही थी कि राजसिंह भी इस परंपरा का निर्वाह करेंगे और अपनी शादी किसी शाही खानदान में ही करेंगे।

राजसिंह की बहनों को नहीं पसंद थीं लता

राज्यश्री के अनुसार उनकी मां सुशीला सिंह और मौसी इस रिश्ते के एकदम खिलाफ थीं। राज्यश्री की मां सुशीला सिंह की शादी बीकानेर के अंतिम महाराजा डॉ. करणी सिंह से हुई थी जो लोकसभा के निर्दलीय सांसद भी रहे थे। जबकि राज्यश्री की मौसी दांता की महारानी थीं। दांता गुजरात की एक रियासत थी। राज्यश्री अपनी जीवनी में लिखती हैं, लता मंगेशकर को बॉम्बे के पुराने बीकानेर हाउस में आमंत्रित किया गया था और मुझे भरपूर संदेह है कि लता को कह दिया गया था कि वो इन महारानियों के भाई को अकेला छोड़ दें, ताकि वे अपने लिए एक योग्य रानी की तलाश कर सके।

निजी पलों में लता को ‘मिठू’ नाम से बुलाते थे राजसिंह

लंदन में रहने के दौरान राज्यश्री स्वयं लता और मंगेशकर परिवार के अन्य लोगों से मिलती रही हैं। राज्यश्री लता को बेहद विनम्र, जमीन से जुड़ीं, स्नेही और विचारशील शख्सियत के रूप में पेश करती हैं। कहा जाता है कि राजसिंह निजी पलों में लता को ‘मीठू’ कहकर बुलाते थे। इन दोनों ने कई चैरिटेबल मिशनों में एक दूसरे की मदद भी की थी।

क्या लता और राज सिंह ने गुप्त रूप से विवाह किया था ?

लता और राज सिंह डूंगरपुर के बीच यकीनन बहुत प्रेम था। एक-दूसरे के प्रति उनकी वफा ऐसी थी कि दोनों 2009 तक एक दूसरे के प्रति समर्पित और अविवाहित रहे। आखिर 2009 में मुंबई में राजसिंह डूंगरपुर की मृत्यु के साथ इस अफसाने का सिलसिला टूटा। राज्यश्री इस अफवाह को खारिज करती हैं कि दोनों ने गुप्त रूप से विवाह किया था। लेकिन वो इतना जरूर लिखती हैं कि रॉयल परिवारों की रूखाई के बावजूद उनके मामा को अपने युवा भतीजे और भतीजियों का पूरा समर्थन मिलता था।


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