सचिन पायलट समर्थक हारे हुए उम्मीदवारों ने फिर खोला मोर्चा -19 सीटों पर सरकार और संगठन

पायलट के अधीन रहे पीडब्ल्यूडी में गहलोत की बड़ी 'प्रशासनिक सर्जरी
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जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। कांग्रेस में निर्दलियों और बसपा से आने वाले विधायकों को ज्यादा तवज्जो मिलने का मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है। 13 निर्दलियों और 6 बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों को मिलाकर कुल 19 सीटों के हारे हुए सचिन पायलट समर्थक उम्मीदवारों ने एकजुट होकर फिर अनदेखी का मुद्दा उठाया है। पायलट समर्थक हारे हुए उम्मीदवारों ने कल दिल्ली पहुंचकर प्रभारी अजय माकन से मिलने का समय मांगा लेकिन मुलाकात नहीं हुई।

पायलट समर्थक नेता और शाहपुरा से 2018 में कांग्रेस उम्मीदवार रहे मनीष यादव और खंडेला से उम्मीदवार सुभाष मील ने कहा, 19 सीटों पर हम कांग्रेस के टिकट पर हारे, इन सीटों पर कांग्रेस को हराने वाले निर्दलीय और बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों को ही सब कुछ सौंप दिया है। इन 19 विधायकों ने सरकार का समर्थन किया तो हमने स्वागत किया, लेकिन सरकार के साथ संगठन की जिम्मेदारी भी इन इलाकों में उन्हें ही सौंप दी जिन्होंने पार्टी को हराया। जिन कार्यकर्ताओं ने सरकार बनाने में मेहनत की, कांग्रेस के लिए काम किया, उनकी लगातार अनदेखी हो रही है। उन कार्यकर्ताओं की अनेदखी होना गलत है।

पायलट समर्थक 3 नेता दिल्ली से जयपुर लौटे

अजय माकन से मिलकर सरकार और संगठन में अनदेखी का मुद्दा उठाने दिल्ली गए पायलट खेमे के हारे हुए उम्मीदवारों में से तीन वापस जयपुर लौट गए हैं। मनीष यादव के साथ तीन नेता अभी भी दिल्ली ही हैं। कांग्रेस उम्मीदवार रहे रितेश बैरवा दो नेताओं के साथ जयपुर लौट गए।

15 नेताओं ने सोनिया को चि_ी लिखी थी

19 में से 15 हारे हुए उम्मीदवारों ने जयपुर में निर्दलीयों की बैठक से एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चि_ी लिखी थी। चि_ी में भी 19 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार रहे नेताओं और पार्टी के लिए चुनावों में काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनेदखी का मुद्दा उठाया था। चि_ी में लिखा था कि 19 सीटों पर कार्यकर्ता ठगा सा महसूस कर रहा है।

सियासी टकराव फिर तेज होने के आसार

राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमों के बीच बयानबाजी की अब फिर से शुरूआत हो चुकी है। पायलट खेमे ने वापस अपनी मांगों को मुखरता के साथ उठाना शुरू किया है।


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