लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स लिमिट तय, समझें-निवेशकों पर फैसले का असर

Tax limit fixed on long term capital gains, understand the impact of the decision on investors
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नई दिल्ली (एजेंसी)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का आम बजट पेश कर दिया है। इस बार के बजट में कई अहम ऐलान हुए हैं। अगर आप शेयर बाजार में निवेश कर भारी-भरकम मुनाफा कमाते हैं तो आम बजट में एक अच्छी खबर है। दरअसल, सरकार ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) की लिमिट तय कर दी है। अब निवेशकों को एलटीसीजी सरचार्ज 15 फीसदी से ज्यादा नहीं देना होगा। यह प्रावधान सभी तरह के एसेट्स पर लागू होगा। वर्तमान में एलटीसीजी सरचार्ज केवल सूचीबद्ध शेयरों और म्यूचुअल फंड की यूनिट के लिए उपलब्ध है। वहीं, दूसरे एसेट्स से लॉन्ग टर्म कैपिटल पर सरचार्ज की सीमा तय नहीं थी। आसान भाषा में समझें तो दूसरे एसेट्स से लॉन्ग टर्म कैपिटल चार्ज, कुल इनकम के हिसाब से लगता था। मसलन, वर्ष के दौरान 5 करोड़ से अधिक के पूंजीगत लाभ वाले व्यक्ति के मामले में अब तक 37 फीसदी एलटीसीजी सरचार्ज देना होता था। हालांकि, सरकार के नए फैसले के बाद अब ये अधिकतम 15 फीसदी रह जाएगा।

किसे फायदा : शेयर बाजार के एक्सपर्ट सचिन सर्वदे के मुताबिक बजट में एलटीसीजी की लिमिट तय होने का फायदा उन निवेशकों को सबसे ज्यादा होगा, जो शेयर बाजार में निवेश कर भारी भरकम मुनाफा कमाते हैं। इनमें संस्थागत से लेकर अन्य तरह के बड़े निवेशक भी शामिल हैं। कहने का मतलब ये है कि सरकार का ताजा फैसला निवेशकों को बाजार में निवेश के लिए आकर्षित करेगा। शेयर बाजार को बूस्ट देने में ऐसे निवेशकों की बड़ी भूमिका होती है।

2018 में लागू : बता दें कि साल 2018 से सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों की बिक्री पर लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ को टैक्स योग्य बना दिया गया है। इक्विटी निवेश के मामले में, लंबी अवधि का मतलब खरीद की तारीख से एक वर्ष से अधिक की होल्डिंग है। इससे पहले, इक्विटी निवेश पर अर्जित पूंजीगत लाभ टैक्स फ्री था।


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