‘प्रात:काल’ के प्रधान संपादक श्री सुरेश गोयल 78 साल के हुए: जाने उनका अभी तक का सफर

Share

पाठकों की असीमित ख्वाहिशों वाले अद्भुत संसार में सूचनाओं के सच को खरे शब्दों की आंच में पका कर करीने से परोसने वाली पांच दशक से अधिक की हिन्दी पत्रकारिता के यशस्वी स्तंभ ‘प्रात:काल’ के प्रधान संपादक श्री सुरेश गोयल आज जीवन के 78वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी और अपने रचना संसार के ‘आभामंडल’ से हम सबके दिलों पर राज करने वाले श्री गोयल का ट्रेडल मशीन से लेकर आज तक की ट्विटर और ओटीटी की वर्चुअल दुनिया तक का सफर बहुत शानदार, जानदार और प्रेरणास्पद रहा है। फिर बात चाहे अपने ट्विटर के माध्यम से देश-दुनिया के नामचीनों की बहुत ही सधे हुए शब्दों व जन समुच्चय के चेहरों पर आत्मुग्धता की मुस्कान लाने वाली मारक-निश्चेतक शब्दावली की हो या फिर अहम मसलों पर बेलाग टिप्पणियों की, श्री गोयल ने दशकों से ‘वैचारिक ट्रेंडसेटर’ के रूप में सामने आकर पाठकों को ऐसी मानसिक खुराक दी है जो मन को मथ कर उन्हें जिम्मेदार नागरिक व सच्चे देशभक्त होने का बोध कराती है। सरकारी और निजी यात्राओं के दौरान लिखे आपके यात्रा वृतांतों के अनूठे किस्सों की अनुगूंज देश ही नहीं, दुनियाभर के पाठकों के दिलों में बार-बार होती रहती है। गोष्ठियों-बहसों-चर्चाओं का अद्वितीय हिस्सा बनती हैं। अनुभव की तराजू पर तौल कर लिखे गए गागर में सागर वाले शब्द पाठक मन को तृप्त कर आपके यात्रा वृतांतों, पुस्तकों, लेखों, टिप्पणियों आदि को बार-बार पढऩे व उनमें डूब जाने को बाध्य कर देते हैं।  ऐतिहासिक, साहसिक, आपराधिक व रूमानी कथाओं की बात हो या फिर बच्चों की कहानियां, अपराध कथाएं, धारावाहिक चित्रकथाएं।

आपके लेखन का केनवास इतना विशाल और सतरंगी है कि उसे शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं है। आपकी लेखनी में कभी वात्सल्य झलकता है तो कभी सहचर होने का बोध। कभी एहसास होता है कि आप समृद्ध वैचारिक अतीत के हिमायती हैं तो कभी लगता है कि धारदार लेखनी से नए युग का सूत्रपात हर बार आप की ही कलम से संभव हुआ है। पाठकों की स्मृति से झरती खुशबू बताती है कि आपकी लेखनी का जायका गजब का है।

अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में देश के मीडिया का प्रतिनिधत्व कर दुनिया घूम चुके श्री गोयल के ‘प्रात:काल’ में प्रकाशित होने वाले यात्रा संस्मरणों का जादू पाठकों के ऐसा सिर चढ़कर बोलता था कि उनके इंतजार की घडिय़ां काटते नहीं कटती थी व लोग अलसुबह अखबार पढऩे प्रेस तक आ जाया करते थे। श्री गोयल ने ‘प्रात:काल’ के माध्यम से जन सरोकारों के मुद्दों को हमेशा प्राथमिकता दी व संवेदनशीलता दिखाते हुए समाचार अभियानों के माध्यम से उन्हें मुकाम तक पहुंचाया। झीलें, पहाड़, विरासतों का संरक्षण, रेल-रोड कनेक्टिविटी से लेकर बिजली, सड़क, पानी की समस्याओं पर प्रात:काल के माध्यम से निर्णायक व असरकारी जन पक्षीय पहल हुई। नए प्रयोगों को हमेशा आत्मसात करने में अग्रणी रहे श्री गोयल ने दशकों पहले उदयपुर में समाचार चैनल की शुरुआत की।

आज के ब्रेकिंग न्यूज और ब्रेकिंग व्यूज के जमाने से कई दशक पहले ‘प्रात:काल’ के दफ्तर से इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड पर खबरें फ़्लैश हुआ करती थी जिसकी एक झलक पाने पूरा शहर उमड़ता था। चुनाव परिणाम या परीक्षाओं के परिणामों के समय सबसे पहले सूचना, ‘प्रात:काल’ के दफ्तर से दी जाती थी व तब ‘प्रात:काल’ का सूरजपोल दफ्तर गहमागहमी का पावर सेंटर बना रहता। अब नई सदी में बदली समाचार लेखन व मुद्रण की नई तकनीकी के साथ कदमताल करते हुए श्री गोयल ने सोशल मीडिया का बखूबी इस्तेमाल किया। आप जिस दिन ट्विटर पर आए, छा गए।

श्री गोयल इतने ज्यादा लोकप्रिय हो गए कि पाठक सिर्फ आपके ट्विट पढऩे के लिए अखबार की बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं। इतना ही नहीं कई प्रमुख टीवी चैनलों पर आपके ट्विट जनमत को नेतृत्व करती राष्ट्रीय बहसों और विमर्शों का भी हिस्सा बन चुके हैं। हाल-फिलहाल आपकी अस्वस्थता के कारण ट्विटर का प्रकाशन नहीं हो पा रहा है।

श्री गोयल के बहुमुखी व्यक्तित्व का एक सिरा रंगमंच तक भी जाता है। श्री गोयल के मुरीद जानते हैं कि आप बचपन से ही रंगमंच से जुड़ गए। कई नाटकों का लेखन-निर्देशन व उनमें जीवंत अभिनय किया। यात्रा, इतिहास तथा पर्यटन पर हिन्दी व अंग्रेजी की कई पुस्तकों का लेखन किया जिनका मराठी व गुजराती में भी अनुवाद हुआ है। आप प्रतिष्ठित फिल्म राइटर्स एसोसिएशन मुम्बई के सदस्य भी हैं व फिल्म इंडस्ट्री में कार्यरत राजस्थानी कलाकारों की संस्थान मेवाड़ फिल्म फेडरेशन के संस्थापक संरक्षक भी हैं। समाजसेवा के क्षेत्र में आपकी कई मोर्चों पर सक्रिय भूमिका है तो कुछ मोर्चों पर आप सेवा की अनाम अंतर्धारा  के सूत्रधार हैं। उदयपुर में अग्रवाल सार्वजनिक धर्मशाला की स्थापना में आपकी भूमिका रही। उदयपुर में राजस्थान के प्रथम गैस आधारित शवदाह गृह की स्थापना में अग्रणी भूमिका निभाई।

5 सितम्बर 1979 को श्री गोयल ने देश के प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र ‘प्रात:काल दैनिक’ का प्रकाशन उदयपुर से शुरू किया। कालान्तर में प्रकाशन जयपुर, मुम्बई, दिल्ली एवं जोधपुर से हुआ। श्री गोयल 1984 में पहली बार विदेश यात्रा पर अमेरिका गये। 1997 में वे पुन: अमेरिका, इंग्लैण्ड तथा अन्य यूरोपीय देशों की यात्रा की। वर्ष 2003 में गोयल को प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के साथ ऐतिहासिक पाकिस्तान यात्रा पर जाने का सौभाग्य मिला। वर्ष 2004 में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ थाईलैण्ड तथा 2007 में उन्हीं के साथ नाईजीरिया व दक्षिणी अफ्रीका की यात्रा का भी अवसर भारत सरकार ने दिया। 2008 में भी प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ जापान एवं चीन की यात्रा की। वर्ष 2009 में आपने होंगकोंग, मलेशिया, थाईलैण्ड व सिंगापुर तथा 2011 में दुबई की यात्रा की। गोयल को समय-समय पर विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा विभिन्न उपाधियों एवं सम्मानों से भी सम्मानित किया गया, उन्हें कई सामाजिक संस्थाओं की मानद सदस्यता भी प्रदान की गई।


Share