मोरेटोरियम पीरियड पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा

मोरेटोरियम पीरियड पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा
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नई दिल्ली (एजेंसी)। मोरेटोरियम पीरियड के दौरान ब्याज पर ब्याज लगाए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरूवार को भी सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और बैंकों के बयान को रेकॉर्ड पर लेते हुए कहा है कि 31 अगस्त तक जो लोन अकाउंट एनपीए घोषित नहीं हुए हैं, वे सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक एनपीए घोषित नहीं किए जाएंगे। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 सितंबर की तारीख तय कर दी है। कोविड-19 के दौरान छह महीने के लिए बैंक लोन के ईएमआई के पेमेंट पर स्थगन के दौरान ब्याज लिए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कोविड 19 के कारण हर सेक्टर पर असर पड़ा है।

मेहता ने कहा कि कोविड-19 के कारण लॉकडाउन हुआ और देश के हर सेक्टर चाहे आईटी हो या फिर फार्मा सेक्टर या फिर अन्य सेक्टर हो हर सेक्टर प्रभावित हुआ है। मार्च और मई में लॉकडाउन के दौरान आरबीआई ने दो सर्कुलर के जरिए लोन पेमेंट का स्थगन किया था और पहले तीन महीने और फिर दोबारा तीन महीने की छूट दी गई थी। इसके पीछे मकसद यह था कि लोगों को कोविड और लॉकडाउन के दौरान बोझ से मुक्ति दी जा सके क्योंकि इस दौरान बिजनेस पर असर हुआ था। लेकिन इसका मकसद यह कतई नहीं था कि ब्याज माफ कर दिया जाएगा।

सॉलीसीटर जनरल की दलील

उन्होंने कहा कि मोरेटोरियम अवधि एक सहूलियत थी। साधारण तौर पर जब कोई लोन अकाउंट में 90 दिन पेमेंट नहीं आता है तो वह एनपीए हो जाता है। लेकिन मोरेटोरियम अवधि को उससे अलग किया गया है। यानी मोरेटोरियम अवधि में बैंक अकांउट एनपीए नहीं होता है। मेहता ने कहा कि 6 अगस्त का सर्कुलर है जिसमें कई सहूलियतें हैं और लोन के पुनर्गठन की भी बात है और कई समाधान हैं। एक्सपर्ट कमिटी कुछ गाइडलाइंस 6 सितंबर को जारी करने वाली है।

हरीश साल्वे ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट में इंडियन बैंक असोसिएशन की ओर से हरीश साल्वे ने कहा कि बैंक समाधान लेकर आ सकता है। आम लोन के लेनदार और कॉरपोरेट अलग बातें हैं और दोनों के केस को अलग तरीके से देखा जा रहा है। इस दौरान जस्टिस अशोक भूषण ने सवाल किया कि जो लोग कोविड काल से पहले के डिफॉल्टर हैं उन्हें कोविड स्कीम का लाभ नहीं मिलेगा? तब हरीश साल्वे ने कहा कि जो पहले से 2019 से डिफाल्टर है, उन्हें अलग स्कीम में लाभ मिलेगा।

कोविड स्कीम में उन्हें लाभ नहीं मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट में साल्वे ने यह दलील भी दी कि एनपीए के डिफॉल्ट पीरियड में 90 दिन का पीरियड काउंट नहीं होगा। बल्कि मोरेटोरियम अवधि पूरा होने के बाद 90 दिन की गिनती शुरू होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें लोन लेने वालों को प्रोटेक्ट करना होगा। अदालत ने बैंक और सॉलिसिटर जनरल के बयान को रेकॉर्ड पर लिया और कहा कि 31 अगस्त तक जो बैंक लोन अकाउंट एनपीए नहीं हुआ है वह अगले आदेश तक एनपीए नहीं होगा। कोर्ट 10 सितंबर को आगे की सुनवाई करेगी।


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