सुको बोला- हमारे जजमेंट के खिलाफ कानून नहीं बना सकती सरकार

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नई दिल्ली (एजेंसी)। देश भर के ट्राइब्यूनल की वैकेंसी भरने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई और केंद्र सरकार से कहा है कि आप हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि आपने ट्राइब्यूनल को प्रभावहीन बना दिया है, बार बार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ट्राइब्यूनल की वैकेंसी न भरे जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कि हमारे पर एक ऑप्शन है कि ट्राइब्यूनल को बंद कर दें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जजमेंट के विपरीत सरकार कानून नहीं बना सकती। शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र ने उसी कानूनी प्रावधान को दोबारा बना दिया जिसे सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया था।

‘फैसले का सम्मान नहीं करना चाहती सरकार’

चीफ जस्टिस रमना ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस कोर्ट के जजमेंट का कोई आदर नहीं दिखता है। आप (केंद्र सरकार) हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। आपने कितने लोगों की नियुक्ति की है ये बताएं? आपने कहा कि कुछ की नियुक्ति हुई है। आप बताएं कहां है नियुक्ति? बेंच ने कहा कि इस अदालत के फैसले का कोई सम्मान नहीं है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आपने पिछली बार कहा था कि कुछ मेबरों की नियुक्ति हुई है। आप बताएं कि कितनों की नियुक्ति हुई। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ट्राइब्यूनल ऐक्ट 2021 दरअसल उसी कानून का रिपीट (दोहराया जाना) है जिस कानून को सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में निरस्त कर दिया था।

वहीं जस्टिस राव ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के बार-बार कहने के बावजूद अभी तक नियुक्ति क्यों नहीं की गई। कई ट्राइब्यूनल तो बंद होने के कागार पर हैं। चेयरपर्सन और मेंबर की कमी के कारण ट्राइब्यूनल खत्म हो रहा है। आप बताइये कि आपकी क्या वैकल्पिक स्कीम है? क्या आप ट्राइब्यूनल बंद करना चाहते हैं?


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