छात्रा का दहलाने वाला सुसाइड नोट- लड़की सिर्फ मां की कोख में सुरक्षित या फिर कब्र में, मां-बाप लड़कों को हमारी इज्जत करना सिखाएं

student's shocking suicide note Girl safe only in mother's womb or in grave, parents should teach boys to respect us
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चेन्नई (एजेंसी)। चेन्नई में 11वीं की एक छात्रा ने सेक्शुअल हैरेसमेंट और शोषण से तंग आकर सुसाइड कर लिया। उसने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें पूरी आपबीती लिखी है। इस मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत 21 साल के एक कॉलेज स्टूडेंट को अरेस्ट किया गया है। सुसाइड नोट में छात्रा ने लिखा है कि एक लड़की सिर्फ अपनी मां की कोख या फिर कब्र में ही सुरक्षित रहती है।

रिश्तेदारों और टीचर्स का जिक्र

छात्रा ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि स्कूल सुरक्षित नहीं हैं। टीचर्स पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता। मानसिक रूप से परेशान होने की वजह से मैं न पढ़ पा रही हूं और न ही सो पा रही हूं। हर मां-बाप को अपने बच्चों और लड़कों को सिखाना चाहिए कि लड़कियों का सम्मान करें। सुसाइड नोट के आखिर में छात्रा ने अपने रिश्तेदारों और टीचर का जिक्र करते हुए लिखा- और यौन उत्पीडऩ बंद करो। जस्टिस फॉर मी।

आरोपी स्टूडेंट ने गुनाह कबूला

इस मामले में अरेस्ट कॉलेज स्टूडेंट ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। पुलिस को दिए बयान में आरोपी ने बताया कि उसने छात्रा के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। वह पिछले दो हफ्ते से उसे परेशान कर रहा था। लगातार अश्लील और गंदे मैसेज भेजता था। आरोपी ने यह भी बताया कि 8 महीने पहले तक उन दोनों की बीच बहुत अच्छी दोस्ती थी।

तीन साल पहले हुई थी पहचान

पुलिस की जांच में पता चला है कि छात्रा और आरोपी लड़का दोनों एक ही स्कूल में थे। यहीं तीन साल पहले उनकी दोस्ती हुई थी। बाद में छात्रा गर्ल्स स्कूल चली गई, लेकिन इसके बाद दोनों इंस्टाग्राम पर दोस्त बन गए थे। सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं और लोगों ने भी तो छात्रा को प्रताडि़त नहीं किया था।

स्टालिन ने की थी शिकायत करने की अपील

तमिलनाडु में बीते कुछ हफ्तों में सेक्शुअल हैरेसमेंट की वजह से चार लड़कियां सुसाइड कर चुकी हैं। इनमें दो मामलों में टीचर ही आरोपी थे। इस तरह की घटनाएं लगातार होने पर राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक वीडियो मैसेज जारी कर कहा था कि जब भी किसी की जान जाती है तो मुझे बहुत तकलीफ होती है। इस तरह के कदम उठाने की जगह पीडि़तों को आरोपियों की शिकायत दर्ज कर उन्हें सजा दिलानी चाहिए।


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