महाराष्ट्र संकट की कहानी : एमएलसी चुनाव से 2 दिन पहले तैयार हुई सूरत की स्क्रिप्ट, एमएलसी चुनाव में हंगामा कर भाजपा ने उद्धव को भटकाया, शिंदे को रातोंरात निकलने में मदद की

 उद्धव को एक और झटका देंगे शिंदे, मुंबई में खुलेगा एक और शिवसेना भवन
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मुंबई (कार्यालय संवाददाता)।  शिवसेना में दूसरे नंबर के नेता नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने बगावत का फूलप्रूफ प्लान तैयार किया था। इस प्लान की गोपनीयता इसी से समझी जा सकती है कि सूरत जाते समय शिंदे अपने साथ सिक्योरिटी भी नहीं ले गए। शिंदे के साथ रातों रात मुंबई छोडऩे वाले शिवसेना के 15, एनसीपी के एक और 14 निर्दलीय विधायक जब सूरत के ली मेरिडियन होटल पहुंच गए तब लोगों को खबर लगी। सूत्रों के मुताबिक मुंबई से सूरत गुपचुप पहुंचाने में बीजेपी के एक बड़े नेता ने इन बागियों की मदद की है। जानकारी मिली है कि बागी विधायकों में से कुछ स्पेशल प्लेन से और कुछ सड़क मार्ग से सूरत पहुंचे।

एमएलसी चुनाव से पहले तैयार थी सूरत की स्क्रिप्ट

सूत्रों के मुताबिक, सूरत जाने की पूरी स्क्रिप्ट सोमवार को हुए विधानपरिषद चुनाव से दो दिन पहले लिखी गई थी और चुनाव के दौरान बीजेपी के हंगामे के बाद इसे अमली जामा पहनाया गया। काउंटिंग के दौरान बीजेपी की ओर से क्रॉस वोटिंग का संदेह जताते हुए कुछ देर के लिए हंगामा भी किया गया था। इसके बाद महाविकास अघाड़ी के नेताओं का ध्यान उस ओर चला गया और शिंदे और उनके समर्थित विधायक इसी का फायदा उठाते हुए धीरे से सूरत के लिए निकल लिए।

शिंदे-फडणवीस की दोस्ती का भी रोल!

‘ऑपरेशन लोटस’ के सबसे बड़े किरदार यानी एकनाथ शिंदे और पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस की दोस्ती जगजाहिर है। फडणवीस सरकार में उनके पास पीडब्लूडी मंत्रालय था। बाला साहब के जाने के बाद शिंदे, बीजेपी और शिवसेना के बीच एक कड़ी के रूप में देखा जाता था। समृद्धि एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के दौरान एकनाथ शिंदे विधानपरिषद और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच मजबूत राजनीतिक दोस्ती और मजबूत हुई। उसी दोस्ती से का परिणाम आज की इस बगावत को माना जा रहा है।

सूरत से गुवाहाटी ले जाने की तैयारी

एकनाथ शिंदे समेत उनके साथ बागी विधायकों को किसी भी वक्त सूरत से एयरलिफ्ट कर गुवाहाटी ले जाने की तैयारी है। ला मेरिडियन होटल में तीन बसें पहुंच गईं हैं, जिससे शिवसेना के 33 और 4 निर्दलीय विधायक हवाई अड्डे तक पहुंचेंगे। यहां से विधायक स्पेशल विमान से गुवाहाटी के लिए रवाना होंगे।

सूत्रों के मुताबिक सुबह ठाकरे सरकार के लोग तनाव में नजर आ रहे थे और शाम को उनकी देहभाषा कुछ और ही बयां कर रही थी। सब लोग रिलैक्स्ड लग रहे थे। यानी एकनाथ शिंदे से मिलिंद नार्वेकर की मुलाकात के बाद। सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्रसे 6 चार्टर्ड प्लेन सूरत पहुंचे थे। विमान अल सुबह इन विधायकों को लेकर महाराष्ट्रके लिए उड़ान भरेंगे। ये बात इससे भी पुष्ट होती है कि चेकआउट की अग्रिम सूचना होटल में भी दी गई है।

उद्धव ने अपने विधायकों से मीटिंग में भरोसा जताया था कि एकनाथ शिंदे उनकी बात सुनेंगे और सब सही हो जाएगा। माना ये जा रहा है कि महाराष्ट्रसंकट संभल जाएगा पर राजनीति में जब तक कुछ हो न जाए… तब तक वह बस कयास ही रहता है।

उद्धव से नाराजगी की वजह

कभी शिवसेना के काफी करीब रहे और वर्तमान में महाराष्ट्रनवनिर्माण सेना के थिंक टैंक कहे जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार वागीश सारस्वत ने बताया कि शिंदे की बगावत एक दिन का परिणाम नहीं, बल्कि यह उद्धव ठाकरे द्वारा लगातार उनकी की जा रही अवहेलना और अनदेखी के कारण हुई है।

शिवसेना प्रमुख के मुख्यमंत्री बनने से पहले एकनाथ शिंदे का नाम महाविकास अघाड़ी के सीएम पद के लिए आया था। इसके बाद उन्हें नगर विकास मंत्री बना दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, शिंदे अपने मंत्रालय में सीएम और उनके बेटे आदित्य ठाकरे के दखल की वजह से नाराज थे। उनके करीबी लोगों का कहना था कि बिल्डर लॉबी से जुड़े लोग सीधे सीएम से मिल रहे हैं और उनके काम में अड़चन पैदा कर रहे हैं।

सरकार में विधायक भी उपेक्षा से नाराज

सारस्वत ने बताया कि शिंदे के साथ होटल में रुके अन्य सभी विधायक महाराष्ट्रके ग्रामीण भाग से आते हैं। वे ऐसे इलाकों से आते हैं, जहां शिवसेना के नाम का उनको कोई फायदा नहीं होता है। वे अपने दम पर किसी भी पार्टी में रहने के दौरान चुनाव जीत सकते हैं। ऐसे में वे महाविकास अघाड़ी के मंत्रियों द्वारा की जा रही अवहेलना से नाराज थे। कई बार मीटिंग में भी उन्होंने अपने इलाकों को फंड नहीं देने की बात कही थी। शिंदे को शिवसेना के बड़े क्षत्रप के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि वे भी नाराज होकर शिंदे के साथ चले गए हैं। शिंदे गुट के नेताओं का मानना है कि शिवसेना अब सीएम उद्धव ठाकरे, मुंबई, संजय राउत और आदित्य ठाकरे तक सिमट कर रह गई है। सीएम शिवसेना के नेताओं से ज्यादा एनसीपी के मंत्रियों और विधायकों को तरजीह दे रहे हैं।

पार्टी में शिंदे ताकतवर, फिर भी खिलवाड़

शिंदे को ठाकरे परिवार के बाद सबसे ताकतवर शिवसैनिक माना जाता है। 1980 में शिवसैनिक बने एकनाथ शिंदे लगातार चार बार से ठाणे की कोपरी-पांचपखाडी सीट से विधायक हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद जब शिवसेना भाजपा से अलग हुई तब उद्धव ठाकरे ने उन्हें विधायक दल का नेता चुना था।


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