सोनिया के सामने अंदरूनी उठापटक का संकट – इंदिरा व राजीव भी कर चुके हैं सामना

सोनिया के सामने अंदरूनी उठापटक का संकट
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नई दिल्ली (एजेंसी)। कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी को 23 नेताओं की तरफ से लिखे पत्र ने पार्टी में अभूतपूर्व स्थिति पैदा कर दी है। सोनिया के सामने पार्टी में अंदरूनी उठापटक का यह संकट दूसरी बार पैदा हुआ है।

इस संकट की पहली झलक सोमवार को होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में दिखने की उम्मीद है। कांग्रेस में नेतृत्व के मुद्दे पर चल रही चर्चा के बीच पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक आगामी सोमवार को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से होगी। बैठक में पार्टी नेताओं के खींचतान के बीच इस मुद्दे को दबाना मुश्किल होगा। सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेताओं के इस कदम के जवाब के रूप में संगठन के स्तर पर बड़े फेरबदल का फैसला लिया जा सकता है।

हालांकि, यह कदम शायद पर्याप्त ना हो। ऐसा बहुत कम होता है कि पार्टी के नेता, विशेष रूप से वरिष्ठ नेता इस तरह से खुलकर पार्टी नेतृत्व की आलोचना करें। इसे वरिष्ठ नेताओं की तरफ से आखिरी कदम के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस के इतिहास में सोनिया गांधी से पहले इंदिरा गांधी और राजीव गांधी भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर चुके हैं।

कांग्रेस नेताओं का पत्र और मौजूदा संकट पहले के संकटों से अलग है। इससे पहले 1969 में इंदिरा गांधी को सिंडिकेट संकट का सामना करना पड़ा। 80 के दशक में वीपी सिंह और राजीव गांधी के बीच मतभेद पैदा हो गए था। इसके बाद वीपी सिंह ने पार्टी छोड़ दी थी। आपातकाल के बाद जब जगजीवन राम जैसे कई लोगों ने पार्टी छोड़ दी थी।
1990 के दशक में कांग्रेस को ऐसे ही संकट का सामना करना पड़ा था जब नेताओं ने सीताराम केसरी को बाहर करने और सोनिया गांधी के लिए रास्ता खोलने को हाथ मिलाया था। हाल में लिखे गए इस पत्र में उठाए गए मुद्दे के साथ ही इसकी टाइमिंग, संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। इस बार, पार्टी अपनी सबसे कमजोर स्थिति में है।

पार्टी की लोकप्रियता और चुनावी प्रदर्शन पर जबरदस्त चोट पड़ी है। कांग्रेस समर्थकों को बीच एक व्यापक धारणा बन गई है कि पार्टी अस्थिर है और नेतृत्व दिशाहीन है। कई लोग इस पत्र लिखने वाली मंडली में शामिल हो सकते हैं जो परिवार पर दबाव डाल सकते हैं। उदाहरण के लिए, यह पत्र अगस्त के पहले सप्ताह में लिखा गया था। उस समय सचिन पायलट-अशोक गहलोत के बीच खींचतान चल रही थी।

पार्टी के कई नेता राहुल गांधी के लगातार चीनी आक्रमण जैसे मुद्दों पर ट्वीट्स को अपरिपक्व मानते हैं। साथ ही इन मुद्दों पर पार्टी के बीच चर्चा नहीं किए जाने की बात भी कह रहे हैं। मालूम हो कि राहुल के इन ट्वीट ने सबका ध्यान आकर्षित किया है और इनके जरिये सत्तारूढ़ भाजपा पर हमले किए गए हैं।


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