किसान आंदोलन से हलकान मोदी सरकार को थोड़ी राहत

किसान आंदोलन से हलकान मोदी सरकार को थोड़ी राहत
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नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन 19वें दिन भी जारी रहा। इस बीच विभिन्न राज्यों के 10 किसान संगठनों ने कृषि कानूनों को किसान हितैषी बता दिया। इन संगठनों ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की और अपना समर्थन पत्र सौंपा। इससे पहले हरियाणा और उत्तराखंड के किसानों का प्रतिनिधिमंडल भी कृषि मंत्री से मिल चुका है। रविवार को उत्तराखंड के 100 से ज्यादा किसानों का प्रतिनिधिमंडल तोमर से मिला और उनसे आग्रह किया कि इन किसान हितैषी कानूनों को निरस्त नहीं किया जाए। उधर, आंदोलनकारी किसान इन तीनों कानूनों को वापस लेने से कम पर सुलह करने को राजी ही नहीं हैं।

एक-एक खंड पर बातचीत को तैयार : तोमर

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों के साथ वार्ता की अगली तारीख तय करने के लिए सरकार उनसे संपर्क में है। तोमर ने कहा, बैठक निश्चित रूप से होगी। हम किसानों के साथ संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी समय बातचीत के लिए तैयार है। किसान नेताओं को तय करके बताना है कि वे अगली बैठक के लिए कब तैयार हैं। उन्होंने कहा, हमने किसानों और किसान नेताओं को मनाने का प्रयास किया। हमारी इच्छा है कि वे प्रत्येक खंड पर बातचीत करने के लिए आएं। अगर वे हर खंड पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए तैयार हैं तो हम विचार-विमर्श के लिए तैयार हैं।

प्रदर्शनकारी किसानों की 40 यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ सरकार की बातचीत की अगुवाई तोमर कर रहे हैं। इसमें उनके साथ केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग तथा खाद्य मंत्री पीयूष गोयल तथा वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री सोम प्रकाश शामिल हैं। केंद्र और किसान नेताओं के बीच अब तक हुई पांच दौर की वार्ताएं बेनतीजा रही हैं। सरकार ने किसान संघों को एक मसौदा प्रस्ताव उनके विचारार्थ भेजा है, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को जारी रखने का लिखित आश्वासन भी है, लेकिन किसान यूनियनों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और कानूनों को निरस्त करने की मांग की है। तोमर ने कहा कि ये कानून किसानों की जिंदगी बदलने वाले हैं और इन कानूनों के पीछे सरकार की नीति और मंशा स्पष्ट है।


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