नीतीश पर नरम लेकिन मोदी पर गरम

नीतीश पर नरम लेकिन मोदी पर गरम
Share

पटना  (एजेंसी)। बिहार में शिक्षा को मुद्दा बनाकर एनडीए से अलग होने वाले उपेंद्र कुशवाहा अब अपने नए प्लान पर काम कर रहे हैं। इस प्लान का नाम है  ‘नीतीश पर नरम लेकिन मोदी पर गरम।Ó चौंकिए मत, कुशवाहा इस प्लान पर काम शुरू भी कर चुके हैं। सवाल ये है कि क्या कुशवाहा इस नीति के तहत फिर से सत्ता की मुख्यधारा में जुड़ पाएंगे। जानिए इनसाइड स्टोरी

पहले तेजस्वी को कोसा

उपेंद्र कुशवाहा को अपने कम बैक प्लान के लिए एक ऐसे मसले की जरूरत थी जो ताजा हो। वो मौका मिला बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र में, जब तेजस्वी ने नीतीश पर ऐसी टिप्पणी कर दी जिसे मर्यादा का उल्लंघन बताया गया। उपेंद्र कुशवाहा को वो मौका मिल चुका था जिसकी उन्हें तलाश थी। उन्होंने बगैर देर करते हुए तेजस्वी को कोसते हुए एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा कि  माननीय तेजस्वी यादव ने आज सदन में माननी मुख्यमन्त्री नीतीश कुमार जी के प्रति जिस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग किया, वह घोर निंदनीय है ! छी: छी: ! क्या इसी राड़ी-बेटखउकी के लिए सदन है ?

इसके बाद नीतीश के करीब

आने का प्लान

सूत्रों के मुताबिक उपेंद्र कुशवाहा के इस ट्वीट के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फोन करके उन्हें धन्यवाद दिया। धन्यवाद इसलिए क्योंकि कुशवाहा ने एनडीए विरोध के बावजूद नीतीश के समर्थन में ट्वीट जो कर दिया था। सूत्र बताते हैं कि इसी के बाद नीतीश और कुशवाहा की मुलाकात का समय तय हुआ। 2 दिसंबर को तय समय पर दोनों मिले भी। सियासी गलियारे में चटखारे लेकर ये बात कही जा रही है कि नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा से कहा कि कहां विरोध में पड़े हैं, हमारे साथ आइए, नए सिरे से मिलकर काम करते है! अब इस बात में कितनी सच्चाई है, ये तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जाने या फिर उपेंद्र कुशवाहा। लेकिन इस सियासी मुलाकात का तो चर्चा-ए-आम हो चुका है।

कुशवाहा के प्लान का अगला कदम

नीतीश से दोस्ती की ओर कुशवाहा अपना कदम बढ़ा चुके थे। लेकिन विपक्ष में रहकर समर्थन कैसे दिया जा सकता है। इसके लिए भी कुशवाहा के पास मौका मौजूद था। किसान आंदोलन… बिल्कुल नीतीश पर नरम रहने का काम हो गया था लेकिन मोदी पर गरम होने का इससे बढिय़ा मौका और क्या मिलता। दिखना भी तो चाहिए कि भई हम विपक्ष में हैं तो विरोधी का धर्म भी निभा रहे हैं। 2 दिसंबर की मुलाकात तो हो गई थी, 3 दिसंबर के बाद कुशवाहा ने अपना अगला दांव भी खेल दिया। यानि नीतीश से मुलाकात में नरमी के प्लान के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने गरम होकर प्र.म. मोदी पर हमला बोल दिया और किया ये ट्वीट।

इस ट्वीट में उपेंद्र कुशवाहा ने लिखा कि केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में देशभर के विभिन्न किसान संगठनों द्वारा 8 दिसंबर के भारत बंद को रालोसपा की तरफ से पूर्ण समर्थन है। किसानों का दमन और कॉरपोरेट घरानों को फायदा स्वीकार्य नहीं !

नीतीश और कुशवाहा, दोनों को एक दूसरे की जरूरत

जानेमाने पॉलिटिकल एक्सपर्ट और शिक्षाविद् डॉक्टर संजय कुमार बताते हैं कि ताजा हालात में उपेंद्र कुशवाहा को भी लग रहा है कि धारा के विपरीत राजनीति करना उनके लिए घाटे का सौदा साबित हुआ है। संजय के मुताबिक कुशवाहा को अब ये मालूम चल गया कि महत्वाकांक्षी तेजस्वी यादव उन्हें राजनीति का वो फलक कभी नहीं देंगे जिसकी कुशवाहा को तलाश है। इसीलिए नीतीश के साथ रहने में कुशवाहा को फायदा नजर आ रहा है।

अब बात नीतीश कुमार की जिन्होंने अपनी राजनीति की बुनियाद ही लवकुश समीकरण पर रखी थी। बिहार चुनाव 2020 में नीतीश कुमार ने 15 कुशवाहा नेताओं को टिकट दिया जिसमें से 10 हार गए। डॉक्टर संजय के मुताबिक अगर कुशवाहा नीतीश के साथ आते हैं तो फिर छ्वष्ठ का वोट बैंक बढऩा एक तरह से तय ही है। यानि ताली दोनों हाथों से ही बजेगी, इसमें कोई शक या सुबहा नहीं है।

सवाल- उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी का जदयू में विलय करेंगे?

इस सवाल का जवाब ढूंढना थोड़ा मुश्किल है। नीतीश कुमार हों या फिर उपेंद्र कुशवाहा… दोनों ही चतुर नेता हैं। कुशवाहा केंद्र की कुर्सी ठुकराकर गलती कर चुके हैं, ऐसे में वो अपनी पार्टी की बलि यानि उसका विलय नहीं करना चाहेंगे। सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा की नई दोस्ती अभी प्रीमैच्योर यानि अधपकी है। इसमें अभी बहुत कुछ होने की गुंजाइश है।

सवाल ये है कि नीतीश और कुशवाहा दोनों का ही ध्यान किस गुंजाइश की तरफ ज्यादा है। हालांकि इसमें एक तीसरा पक्ष भी है यानि भाजपा, कुशवाहा को अगर नीतीश को साधना है तो फिर उन्हें भाजपा से भी गुरेज करने से बचना होगा। खैर, ये सियासत है… इसमें सब संभव है।


Share