‘शोले’ शीर्षक का मनमर्जी से उपयोग नहीं किया जा सकता, यह वो प्रतिष्ठित फिल्म है, जिसने भारतीयों को आकर्षित किया है : कोर्ट

'शोले’ शीर्षक का मनमर्जी से उपयोग नहीं किया जा सकता, यह वो प्रतिष्ठित फिल्म है, जिसने भारतीयों को आकर्षित किया है : कोर्ट
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नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्च न्यायालय ने कहा है कि ‘शोले’ एक प्रतिष्ठित फिल्म का शीर्षक है, जिसका एक प्रतीक के रूप में मनमर्जी से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस फिल्म के शीर्षक का इस्तेमाल करने पर रोक लगाने के साथ ही प्रतिवादी पर 25 लाख रूपये जुर्माना भी लगाया है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने एक ट्रेडमार्क मुकदमे का निपटारा करते हुए अपने आदेश में कहा कि कोई एक ऐसी फिल्म है, जिसने भारतीयों को पीढ़ी दर पीढ़ी आकर्षित किया है तो वह शोले है। अदालत ने अपना व्यवसाय चलाने के लिए लोकप्रिय फिल्म के शीर्षक का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दायर करने वाले फिल्म निर्माताओं, शोले मीडिया एंड एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड और सिप्पी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को 25 लाख   का हर्जाना दिए जाने का भी निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा कि शीर्षक और फिल्में ट्रेडमार्क कानून के तहत मान्यता प्राप्त करने में सक्षम हैं। अदालत ने 23 मई को जारी अपने आदेश में कहा प्रतिवादी, निदेशक, साझेदार, मालिक और उनकी ओर से काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी सामान और सेवाओं के संबंध में शोले नाम का उपयोग करने पर रोक है। वादी की ओर से वकील प्रवीण आनंद और लॉ फर्म आनंद एंड आनंद के ध्रुव आनंद ने प्रतिवादी के खिलाफ कई उल्लंघनकारी गतिविधियों में शामिल होने के लिए मुकदमा दायर किया था। प्रतिवादी शोले नाम का इस्तेमाल कर एक डोमेने पंजीकृत करना चाहते थे और एक पत्रिका को भी प्रकाशित करना था, जिसमें फिल्म के दृश्यों और नामों का उपयोग किया गया था। याचिका में कहा गया कि प्रतिवादियों का इरादा अमेरिका में पंजीकृत   वेबसाइट बनाकर उनके मुवक्किलों से पैसे वसूल करना था।


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