कला के कद्रदानों से आबाद रहा शिल्पग्राम

Shilpgram was inhabited by art aficionados
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उदयपुर। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित शिल्पग्राम उत्सव मेें मंगलवार को सर्द मौसम भी कलात्मक वस्तुओं के खरीददारों का जोश ठण्डा नहीं कर सका तथा लोगों ने जमकर खरीददारी की। दर्पण सभागार में कला प्रस्तुतियाँ हुई जिसमें गोवा के कलाकारों ने लोक नृत्यों से कोंकणी संस्कृति से रूबरू करवाया। उत्सव में बुधवार को आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत रंगोली व माण्डणा प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।

हाट बाजार में सबसे ज्यादा खरीददार कश्मीरी शिल्पकारों के इर्द गिर्द नजर आये तथा लोगों कश्मीरी पश्मिना, गर्म व ऊनी शॉल, नमदे के कारपेट, जूतियाँ, वूलन कारपेट, हिमाचली टोपी, लैदर के हाफ जैकेट, वूलन कोट आदि के साथ-साथ वूलन सलवार सूट के अलावा वुडन ट्रे, लकड़ी के कलात्मक बॉक्स, फोटो फ्रेम, मिट्टी के कप, केन की बनी कलात्मक व सजावटी वस्तुएं, गार्डन चेयर्स, वुडन गुल्लक, सिरैमिक की कलात्मक वस्तुएं, पट्ट चित्र, कच्छी शॉल, बाड़मेरी पट्टू और पट्टू के बनी बंडियाँ, एप्लिक वर्क, कुशन सैट, मिट्टी की मूर्तियां आदि की खरीददारी उल्लेखनीय हैं।

उत्सव के दौरान मंगलवार को सभी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दर्पण सभागार में हुई जिसमें गोवा से आयें कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दी।  दोपहर में दर्शकों को कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुति देखने को  मिली जिसे दर्शकों ने भरपूर सराहा। कार्यक्रम में गुजरात के छाटा उदेपुर के राठवा आदिवासियों का राठवा नृत्य दर्शकों को खूब रास आया जिसमें कलाकारों द्वारा पिरामिड की रचना कर प्रस्तुति को मोहक बनाया गया।

इस अवसर पर महाराष्ट्र का लेजि़म ने वहां की उत्सवी परंपरा को दर्शाया।शाम को दर्पण सभागार में ही गोवा के कला एवं संस्कृति निदेशालय की ओर से उत्सव में कला प्रदर्शन करने आये दल ने सर्व प्रथम देखणी नृत्य प्रस्तुत किया जिसके साथ गाये जाने वाले गीत की धुन ने बॉबी फिल्म के गीत की याद ताजा करवा दी। कार्यक्रम में ही गोवा के धनगर समुदाय का धनगर नृत्य, कळशी फुगड़ी व कुणबी की प्रस्तुति जहां मोहक रही वहीं गोवा का गौफ नृत्य दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया गया।


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