कुम्भलगढ़ फेस्टिवल का दूसरा दिन

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विश्व विरासत कुम्भलगढ़ में जमकर थिरके पर्यटक, कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने मोहा मन

कुम्भलगढ़ (प्रात:काल संवाददाता)। विश्व विरासत अजेय दुर्ग कुम्भलगढ़ में फेस्टिवल के दूसरे दिन गुरूवार को कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ पर्यटकों के कदम भी जमकर थिरके। जोधपुर से यहां पहुंचे गौतम एण्ड पार्टी की ओर से राजस्थानी घूमर नृत्य आकर्षण का केन्द्र रहा। ठेठ राजस्थानी अंदाज एवं वेश भूषा में सजी-धजी महिलाओं ने लटकों-झटकों के साथ आकर्षक घूमर नृत्य पेश किया। जिससे मौके पर मौजूद देसी-विदेसी पर्यटक भी कलाकारों के साथ ताल से ताल मिला कर खूब ठुमके लगाए। इसके अलावा बाडमेर से आए पारसनाथ एण्ड पार्टी ने लाल आंगी गैर से पर्यटकों की खूब तालियां बटोरी। बाकी सभी कार्यक्रम रिपिट ही रहे। जिसमें मुल रूप से जैसलमेर से आए लंगा पार्टी जस्सुखान एण्ड पार्टी ने केसरिया बालम आवोनी पधारो हारे देश से की कर्णप्रिय लोक गीत पर खूब तालिया बटोरी। संचालन आकाशवाणी कार्यक्रम प्रमुख महेन्द्र सिंह लालस और  पियुष रावल ने किया।

वहीं जोधपुर से आए करूणा एण्ड पार्टी ने कालबेलिया नृत्य की जोरदार प्रस्तुती से वातावरण में राजस्थानी रंग घोल दिया। साथ ही चूरू से आए गोपाल ने होली के अवसर पर किया जाने वाला आकर्षक चंग नृत्य की प्रस्तुती दि तो मौके पर मौजूद पर्यटक भी अपने आप को नहीं रोक नहीं पाए। और जम कर ठुमके लगाए। बारा शाहबाद से आए गोपाल धानुका एण्ड पार्टी ने सहरिया नृत्य की नयनाभिराम प्रस्तुती दी।

इसी प्रकार बाडमेर से आए तगाराम ने सफेदआंगी गैर, बारा से आए शिवराम ने चकरी नृत्य, जयपुर से आए बनवारी लाल ने कच्छी घोड़ी नृत्य एवं स्थानीय कलाकार जीवनदास ने तेराताली तृत्य की जोरदार प्रस्तुतियों से खुब तालिया बटोरी जब की भाबरू जयपुर से आए बेरूपिया मेहबूब एवं गुलजार ने बंदर, बादशाह एवं अन्य भेष बनाकर पर्यटकों का खुब मनोरंजन किया।

इसके अलावा साफा बांधो प्रतियोगिता, रस्साकशी, कुर्सी रेस, मेंहदी मांडणा एवं रंगोली प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ। जिसमें विजेता रहे प्रतिभागियों को पर्यटन विभाग की ओर से पुरूष्कृत किया गया।

इस दौरान हेरिटेज सोसायटी के सचिव कुबेरसिंह सोलंकी, होटल ऐशोसिएशन के अध्यक्ष जमना शंकर आमेटा, जिला पर्यटन अधिकारी जितेन्द्र माली, राकेश खोखावत, निलू राठौड़, कमल चौहान एवं विजय सरसिया मौजूद थे।  फेस्टिवल में दूसरे दिन भी पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोगों की भी खासी भीड़ रही। कुंभलगढ़ महोत्सव के तीन दिवसीय कार्यक्रम में राजस्थान के विभिन्न अंचलों से आए राजस्थान के लोक कलाकारों ने पर्यटकों का खूब मनोरंजन किया।


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