पाक सीमा के पास तैयार हुआ रनवे- पाक सीमा से सटे हाईवे पर 2 मंत्रियों को लेकर उतरा सुपर हरक्युलिस

DRDO ने लड़ाकू विमानों की सुरक्षा के लिए चैफ तकनीक विकसित की
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बाड़मेर (कार्यालय संवाददाता)। भारत ने गुरूवार को एक बार फिर अपनी सुरक्षा की क्षमता का प्रदर्शन किया। पाकिस्तान सीमा से 40 किलोमीटर दूर बाड़मेर के हाईवे पर बनी 3 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी फील्ड लैंडिंग स्ट्रिप पर सुपर हरक्युलिस ने लैडिंग की। सुपर हरक्युलिस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क-परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सवार थे।

इसके बाद फाइटर जेट्स सुखोई-30 और जगुआर ने भी इस इमरजेंसी स्ट्रिप पर टच एंड गो लैंडिंग की। इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत और एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया भी मौजूद थे।

सड़क पर बैलगाड़ी-ट्रैक्टर चलते देखा होगा, इस पर विमान उतरना ऐतिहासिक : राजनाथ

राजनाथ सिंह ने इस एयर स्ट्रिप को सुरक्षा के लिहाज से अहम बताया। बोले, आपने सड़क पर ट्रैक्टर, बैलगाड़ी चलते हुए देखे होंगे और अब आप सड़क पर विमान उतरते हुए देख रहे हैं। इंटरनेशनल बॉर्डर से कुछ ही दूर ऐसी स्ट्रिप का तैयार होना ये साबित करता है कि हम अपनी रक्षा के लिए तैयार हैं और सक्षम हैं। हम एक भारत और सशक्त भारत की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा सेना की ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाने के लिए देश में कई स्थानों पर इस प्रकार की इमर्जेंसी लैंडिंग फील्ड का निर्माण किया जा रहा है। इससे प्राकृतिक आपदा की घड़ी में जनता को जल्द से जल्द राहत पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा, अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर से कुछ ही कदम दूर इस प्रकार की इमर्जेंसी लैंडिंग फील्ड का तैयार होना सिद्ध करता है कि भारत अपनी एकता, संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए सदैव तैयार है। भारत के अंदर किसी भी चुनौती का सामना करने की क्षमता है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी इस मौके पर सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा, हम लोग प्रतिदिन 2 किलोमीटर सड़क बनाने तक आए थे। कोरोना के बावजूद भी हमने प्रतिदिन 38 किलोमीटर सड़क बनाया है जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। मुंबई और दिल्ली के बीच हम लोग एक्सप्रेस हाईवे बना रहे हैं जिसका 60-65′ काम पूरा हुआ है।

इस लैंडिंग पट्टी की खासियतें

इस परियोजना में आपातकालीन लैंडिंग पट्टी के अलावा कुंदनपुरा, सिंघानिया और बाखासर गांवों में वायु सेना/भारतीय सेना की आवश्यकताओं के अनुसार तीन हेलीपैड (प्रत्येक का आकार 100&30 मीटर) का निर्माण किया गया है, जो पश्चिमी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारतीय सेना और सुरक्षा नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण का आधार होगा। ईएलएफ का निर्माण 19 महीने के अंदर पूरा किया गया है। इसका निर्माण कार्य जुलाई 2019 में शुरू किया गया था और जनवरी 2021 में यह सम्पन्न हो गया।

भारतमाला प्रोजेक्ट का है हिस्सा

यह पट्टी भारतमाला परियोजना के तहत गगरिया-बखासर और सट्टा-गंधव खंड के नव विकसित टू-लेन पेव्ड शोल्डर का हिस्सा है, जिसकी कुल लंबाई 196.97 किलोमीटर है और इसकी लागत 765.52 करोड़ रू. है। पेव्ड शोल्डर उस भाग को कहा जाता है, जो राजमार्ग के उस हिस्से के पास हो जहां से वाहन नियमित रूप से गुजरते हैं।


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