फिलहाल नाइट कर्फ्यू ही काफी, संपूर्ण लॉकडाउन की जरूरत नहीं

11 को सभी सीएम के साथ बैठक करेंगे मोदी
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नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरूवार को एक बार फिर कोरोना को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग की। बैठक खत्म होने के बाद मोदी ने कहा कि कोरोना कफ्र्यूू लोगों को अवेयर कर रहा है। हमें इस पर ध्यान देने की जरूरत है। अब माइक्रो कंटेनमेंट जोन पर ध्यान दीजिए। इसमें सरकार को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन यह मेहनत रंग लाएगी। हमने पिछली बार 10 लाख एक्टिव केस देखे हैं। हमने उस पर सफलता पाई थी। अब तो हमारे पास अनुभव और संसाधन दोनों हैं। हम इस पीक को रोक सकते हैं।

लोग पहले की बजाय बहुत लापरवाह हो गए हैं

मोदी ने कहा कि देश पहली लहर की पीक को क्रॉस कर चुका है। इस बार ग्रोथ रेट पहले से ज्यादा तेज है। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और पंजाब समेत कई राज्य पहली लहर की पीक को पार कर चुके हैं। कई राज्य इस ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। यह हमारे लिए चिंता का विषय है। इस बार लोग पहले की अपेक्षा बहुत लापरवाह हो गए हैं। ज्यादातर राज्यों में प्रशासन भी सुस्त नजर आ रहा है।

वैक्सीन से ज्यादा टेस्टिंग जरूरी

प्रधानमंत्री ने कहा, मैं सभी सीएम से आग्रह करता हूं कि आप मशीनरी के जरिए सर्वे करें। पहले कोरोना में हल्के लक्षण में लोग डर जाते थे। इन दिनों लोग समझ रहे हैं कि जुकाम हो गया है। वे परिवार के साथ पहले की तरह जिंदगी जीते हैं। इससे पूरा परिवार लपेटे में आ जाता है। इसका मूल कारण यह है कि लक्षण नहीं हैं। इसके लिए प्रो एक्टिव टेस्टिंग। हम जितनी ज्यादा टेस्टिंग करेंगे उतने ही लोग सामने आएंगे। ऐसा करके हम परिवार को बचा सकते हैं। वैक्सीन से ज्यादा जरूरत टेस्टिंग की करने की है। हमें खुद से टेस्टिंग करने जाना है। लोगों का इंतजार नहीं करना है।

70′ आरटी-पीसीआर टेस्ट होने चाहिए

मोदी ने कहा कि कोराना ऐसी चीज है कि जब तक आप इसे घर में नहीं लाओगे यह नहीं आएगा। इसमें टेस्टिंग और ट्रेकिंग की बहुत जरूरत है। इसे हल्के में नहीं लेना है। 70′ आरटी-पीसीआर टेस्ट होना चाहिए। मेरे पास शिकायत आई है कि टेस्ट में लापरवाही हो रही है। टेस्ट के लिए सैंपल ठीक से लेना चाहिए। जिन राज्यों में लापरवाही हो रही है उन्हें इसे रोकना चाहिए। पॉजिटिव केस होगा तो ट्रीटमेंट होगा। नहीं होगा तो मरीज परिवार को संक्रमित करता रहेगा। कुछ लैब टेस्ट भी अलग-अलग दे रहीं है। यह कमी है। इसे सुधारना होगा।

72 घंटे में 30 कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग से कम टारगेट नहीं होना चाहिए

प्रधानमंत्री ने कहा कि कंटेनमेंट जोन में टेस्टिंग पर बहुत जोर देना है। यहां एक भी व्यक्ति टेस्ट के बिना रूकना नहीं चाहिए। ट्रेकिंग में प्रशासनिक स्तर पर बहुत तेजी की जरूरत है। 72 घंटे में 30 कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग से टारगेट कम नहीं होना चाहिए। कंटेनमेंट जोन की सीमाएं भी तय होनी चाहिए। जहां केस हैं, वही इलाका सील करें। ऐसा नहीं कि एक टॉवर में संक्रमित है उसका बगल वाला टावर सील कर दिया। ऐसा मत कीजिए। जमीन तक जाते-जाते प्रयासों में सुस्ती नहीं आने देनी है।

नई वैक्सीनेशन डेवलपमेंट के लिए कोशिशें जारी

मोदी ने कहा कि एम्स दिल्ली हर मंगलवार और शुक्रवार को वेबिनार करता है। यह लगातार होते रहना चाहिए। सभी हॉस्पिटल इससे जुड़ते रहें। एंबुलेंस, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन का रिव्यू भी जरूरी है। इस बैठक में वैक्सीनेशन के कई बिंदु सामने आए हैं। दुनिया के बड़े देशों ने भी वैक्सीनेशन के लिए क्राइटेरिया तय किए हैं, भारत उनसे अलग नहीं है। आप स्टडी कीजिए, देखिए इसे। नई वैक्सीनेशन डेवलपमेंट के लिए जितनी कोशिश हो सकती है, की जा रही है। स्टॉक और वेस्टेज पर भी चर्चा हुई है।

11 अप्रैल से 14 अप्रैल तक टीका उत्सव मनाएं

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैक्सीन का वेस्टेज रोकना है। राज्यों की सलाह से ही देश के लिए रणनीति बनी है। 45 साल से ऊपर के लोगों को 100′ वैक्सीनेशन का लक्ष्य बनाइए। 11 अप्रैल को   ज्योतिबा फुले और 14 अप्रैल को बाबा आंबेडकर की जयंती है। क्या हम इस दौरान टीका उत्सव मना सकते हैं? अभियान चलाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीनेट करें। इस दौरान जीरो वेस्टेज हो। इससे भी वैक्सीनेशन बढ़ जाएगा। इसके लिए केंद्रों की संख्या बढ़ानी पड़े तो बढ़ाएं।

वैक्सीनेशन में युवा मदद करें

मोदी ने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि टीका उत्सव में ज्यादा से ज्यादा एलिजिबल लोगों को वैक्सीनेट करें। युवा अपने आस-पास के लोगों को वैक्सीन लगाने में मदद करें। नौजवानों से अपील है कि आप बहुत कुछ कर सकते हैं लेकिन ह्यशश्च की जो बातें हैं नौजवान उसे लीड करें। नौजवान वैक्सीन के बजाए प्रोटोकॉल पर जोर दें। पहले भी हम पीक पर जाकर नीचे आए थे। इस बार भी आएंगे।

वैक्सीन लगवाने के बाद भी सावधान रहें

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि डिजिटिल व्यवस्था से लोगों को वैक्सीन लगवाने में मदद मिल रही है। जो लोग ऐसा नहीं कर पा रहे हैं नौजवान उनकी मदद करें। एनसीसी और एनएसएस को इसमें लगाएं। शहरों में गरीब बुजुर्ग हैं उन्हें वैक्सीन लगवाने ले जाएं। वैक्सीनेशन के साथ-साथ इसके बाद भी लापरवाही न बरतें। संकट यही है कि लोग समझते हैं कि मुझे कुछ नहीं होगा। हमें लोगों को बार बार बताना होगा कि प्रोटोकॉल अनिवार्य है। मास्क और सावधानी को लेकर जो लापरवाही आई है उसे लेकर जागरूकता जरूरी है।


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