रेमडेसिविर कोई जादुई गोली नहीं : एम्स, देश के 40% केस महाराष्ट्र में तो उसे उतने ही रेमडेसिविर क्यों न मिलें

केंद्र ने रेमेडिसविर इंजेक्शन का निर्यात रोका
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नई दिल्ली (एजेंसी)।  देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों पर एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने सोमवार को कहा कि पिछले एक साल में कोविड मैनेजमेंट के जरिए हमने दो अहम बातें ”दवा और दवाओं के लिए समयÓÓ सीखी हैं। उन्होंने कहा, अगर आप मरीजों को बहुत जल्दी या फिर बहुत देरी से दवाईयां देते हैं, तो इसका असर घातक हो सकता है। आपने यदि पहले दिन ही उसे दवाओं का कॉकटेल दे दिया, तो इससे मरीज की मौत हो सकती है या फिर कई गुना हानिकारक हो सकता है।

कोरोना के इलाज में कुछ हद तक कारगर मानी जा रही रेमडेसिविर को लेकर एम्स निदेशक ने कहा, यह समझना बेहद जरूरी है कि रेमडेसिविर कोई जादुई गोली नहीं है और ना ही ऐसी दवा है जिससे कोरोना से मरनेवालों मरीजों में कमी आएगी। हमारे पास एंटी-वायरल दवाइयों के नहीं होने से रेमडेसिविर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। कोरोना के बिना लक्षण या फिर हल्के लक्षण वालों को यह दवा जल्दी देने से कोई फायदा नहीं है। इसी तरह से अगर रेमडेसिविर को देर से दिया जाए, तो भी इसका कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि कोरोना के सिर्फ उन मरीजों को ही रेमडेसिविर दिया जाना चाहिए जो अस्पताल में भर्ती हैं और जिनका ऑक्सीजन लेवल काफी गिरा हो और छाती में संक्रमण फैल गया हो। प्लाज्मा थेरेपी से जुड़े सवालों पर भी डॉ. गुलेरिया ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा, अध्ययन बताते हैं कि कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी की भूमिका एक हद तक ही है।

महाराष्ट्र में रेमडेसिविर की कमी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने नोटिस लिया है। कोर्ट की नागपुर बेंच ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि राज्यों को यह इंजेक्शन किस आधार पर बांटा जा रहा है? कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र में देश के 40′ कोरोना मरीज हैं तो उन्हें रेमडेसिविर भी उसी हिसाब से दिए जाने चाहिए।

हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को भी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि जिलों को मनमाने तरीके से रेमडेसिविर का बंटवारा किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने 13 अप्रैल और 18 अप्रैल को नागपुर में रेमडेसिविर की एक भी वायल (शीशी) क्यों नहीं भेजी?

एमिकस ने कहा-40′ रेमडेसिविर राज्य को मिलना चाहिए

इस केस में एमिकस तुषार मंडलेकर ने कोर्ट से कहा कि महाराष्ट्र में संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए 40′ रेमडेसिविर राज्य को मिलना चाहिए। इसके बाद असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल उल्लाहास मनोहर औरंगाबादकर ने कहा कि मैं कल रेमडेसिविर डिस्ट्रीब्यूशन के पैरामीटर्स पर बयान दे सकता हूं। एमिकस कानून के जानकार होते हैं, जिनका केस से सीधा संबंध नहीं होता, लेकिन वे कोर्ट की मदद करते हैं।

एमिकस ने कहा कि रोजाना 2 लाख रेमडेसिविर का प्रोडक्शन देश में हो रहा है। इसकी कोई कमी नहीं है। महामारी अधिनियम 1897 के तहत ही महाराष्ट्र सरकार रेमेडेसिविर का पूरा स्टॉक रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि हर रोज महाराष्ट्र में 40′ कोविड-19 मरीज आ रहे हैं।

रेमडेसिविर का सही बंटवारा नहीं हो रहा

कोर्ट ने कहा कि कोविड-19 से हालात सबसे बुरे दौर में पहुंच गए हैं। लाइफ सेविंग ड्रग की कमी है। ऑक्सीजन की पर्याप्त सप्लाई नहीं हो पा रही। मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ भी कम है। नागपुर में वायरस का स्ट्रॉन्ग वैरिएंट देखा जा रहा है। ठाणे जिले में 2,448 कोरोना बेड पर 5,328 और नागपुर में 8,232 बेड के मुकाबले सिर्फ 3,326 रेमडेसिविर वायल दिए गए हैं। यह तर्क समझ से परे है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि राज्य की समिति रेमेडेसिविर का सही बंटवारा नहीं कर पा रही है।


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