लाल हमला – 2021 का सबसे बड़ा नक्सली हमला, 24 जवान शहीद

लाल हमला - 2021 का सबसे बड़ा नक्सली हमला, 24 जवान शहीद
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बीजापुर  (एजेंसी)। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में पुलिस और नक्सलियों के बीच शनिवार को लगभग चार घंटे चली मुठभेड़ के एक दिन बाद आज दिन में शहीद जवानों की संख्या 5 से बढ़कर 24 हो गयी और 31 जवान घायल हैं।

पुलिस सूत्रों ने मुठभेड़ के बाद रविवार को  प्राप्त सूचनाओं के हवाले से कहा कि 24 जवान शहीद हुए हैं। वहीं 31 जवानों के घायल होने की पुष्टि हुयी है, जिनमें से लगभग एक दर्जन को इलाज के लिए राजधानी रायपुर भेज दिया गया है। शेष का इलाज यहीं पर अस्पताल में चल रहा है। घायल जवानों में भी कुछ ही हालत काफी गंभीर बनी हुयी है। पुलिस का मानना है कि कुछ नक्सलियों के भी मारे जाने की आशंका है, जिनके शव नक्सलियों के कब्जे में ही हैं।  शनिवार को नक्सलियों ने 700 जवानों को घेरकर हमला किया। इस हमले में 24 जवान शहीद हुए हैं। इनमें कोबरा बटालियन के 9, डीआरजी के 8, एसटीएफ के 6 और एक बस्तरिया बटालियन का जवान शामिल है। इस बीच, ग्राउंड जीरो का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें 20 जवानों के शव घटनास्थल पर ही दिखाई दे रहे हैं। वीडियो घटना के 24 घंटे बाद सामने आया और तब तक रेस्क्यू टीम यहां नहीं पहुंची थी।

हालांकि, बाद में रेस्क्यू टीम पहुंची। इस टीम पर भी नक्सलियों ने हमला कर दिया। उन्होंने आईईडी ब्लास्ट भी किया। इस हमले में एक जवान घायल भी हुआ है। 20 जवानों के शव लोकेट कर लिए गए हैं। उनको रिकवर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और एयरफोर्स की मदद मांगी गई है।

शांति वार्ता प्रस्ताव भेजने के बाद से हमले तेज हुए

नक्सलियों ने 17 मार्च को शांति वार्ता का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा था। नक्सलियों ने विज्ञप्ति जारी कर कहा था कि वे जनता की भलाई के लिए छत्तीसगढ़ सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने बातचीत के लिए तीन शर्तें भी रखी थीं। इनमें सशस्त्र बलों को हटाने, माओवादी संगठनों पर लगे प्रतिबंध हटाने और जेल में बंद उनके नेताओं की बिना शर्त रिहाई शामिल थीं।

20 दिन पहले मिली थी नक्सलियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी की जानकारी

करीब 700 जवानों को नक्सलियों ने बीजापुर के तर्रेम इलाके में जोनागुड़ा पहाडिय़ों के पास घेर लिया था। 4 घंटे चली मुठभेड़ में 9 नक्सली भी मारे गए हैं। करीब 31 जवान घायल हुए हैं।  जिस इलाके में मुठभेड़ हुई है, वह नक्सलियों की फर्स्ट बटालियन का कार्यक्षेत्र है। 20 दिन पहले यूएवी की तस्वीरों से यहां बड़ी संख्या में नक्सलियों की मौजूदगी की जानकारी मिली थी।

नक्सलियों ने जवानों पर 3 तरफ से बरसाई थीं गोलियां

सुरक्षा बलों को जोनागुड़ा की पहाडिय़ों पर नक्सलियों के डेरा जमाने की सूचना मिली थी। शुक्रवार रात को ही सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो, सीआरपीएफ बस्तरिया बटालियन और स्पेशल टास्क फोर्स के 2000 जवानों ने ऑपरेशन शुरू किया था, लेकिन शनिवार को नक्सलियों ने 700 जवानों को घेरकर हमला किया था। नक्सलियों ने एक बड़े एंबुश में जवानों को फंसा लिया और तीन ओर से फायरिंग शुरू कर दी। मुठभेड़ सुबह करीब 12.30 बजे शुरू हुई और शाम करीब 5.30 बजे 5 घंटे तक चली। इस दौरान नक्सलियों ने जीएनएल, रॉकेट लांन्चर, इंसास और एके-47 से हमला किया था। पुलिस महानिरीक्षक पी सुंदरराज ने बताया कि मौके पर 180 नक्सलियों के अलावा कोंटा एरिया कमेटी, पामेड़ एरिया कमेटी, जगरगुंडा एरिया कमेटी और बासागुड़ा एरिया कमेटी के लगभग 250 नक्सली भी थे। सूचना मिली है कि नक्सली दो ट्रैक्टरों में शवों को ले गए हैं।

ऑपरेशनल प्लानिंग पर सवाल

सीआरपीएफ के एडीडीपी ऑपरेशंस जुल्फिकार हंसमुख, केंद्र के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार व सीआरपीएफ के पूर्व डीजीपी के विजय कुमार और मौजूदा आईजी ऑपरेशंस पिछले 20 दिनों से जगदलपुर, रायपुर व बीजापुर के क्षेत्रों खुद मौजूद हैं। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में जवानों का शहीद होना पूरी ऑपरेशनल प्लानिंग पर सवाल खड़े कर रहा है।


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