‘राम मंदिर तो सिर्फ 36 महीनों में बना देंगे’

'राम मंदिर तो सिर्फ 36 महीनों में बना देंगे'
Share

– 7 महीने से स्टडी में हो रही देरी : चंपत राय

अयोध्या (एजेंसी)। अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास को करीब 5 महीने बीत चुके हैं, मगर कई तकनीकी दिक्कतों की वजह से अब तक मंदिर की नींव नहीं रखी जा सकी है। ऐसे में रामभक्तों को इंतजार है कि आखिर कब मंदिर का निर्माण शुरू होगा और कब भव्य राम मंदिर बनकर तैयार होगा। उनकी शंकाओं का समाधान राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने किया है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चंपत राय ने कहा कि जिस दिन मंदिर बनना शुरू हो जाएगा, हम 36 से 39 महीनों में इसे पूरा कर देंगे। उन्होंने कहा, हम तो सोचते थे कि जून में ही मंदिर बनना शुरू हो जाएगा, लेकिन 7 महीने से स्टडी पूरी नहीं हो रही। जमीन के नीचे भुरभुरी बालू है या गहराई तक कोई मलबा भरा पड़ा है।

‘फाउंडेशन ऐसा हो जो शताब्दियों तक वजन सहन कर सके’

उन्होंने कहा, फाउंडेशन ऐसा हो, जो मंदिर के वजन को शताब्दियों तक सहन कर सके। इसी को ध्यान में रखते हुए काम किया जा रहा है। दरअसल पिलर्स पर राम मंदिर निर्माण का परीक्षण सफल ना होने के बाद अब नया प्लान तैयार किया जा रहा है। फैसला लिया गया है कि श्रीराम जन्मभूमि परिसर में राम मंदिर निर्माण के लिए अब पिलर्स नहीं बनेंगे। अब खुदाई कर पत्थरों से नींव बनाए जाने पर सहमति बनी है। पिलर्स की ही तरह पहले पत्थरों की नींव बनाकर उसका भी परीक्षण होगा।

खुदाई कर पत्थरों से जमीन को किया जाएगा ठोस

दिल्ली में आयोजित राम मंदिर निर्माण समिति बैठक में आठ सदस्यों की विशेषज्ञ की समिति ने नींव बनाए जाने के लिए रिपोर्ट सौंपी है। जिसके बाद मंदिर निर्माण के लिए भूमि की खुदाई कर नींव बनाए जाने के लिए पत्थरों से उसे ठोस करने का निर्णय लिया गया है। इससे भुरभुरी मिट्टी के बावजूद राम मंदिर की नींव एक हजार साल तक टिक सके।

टेस्टिंग के बाद आर्किटेक्ट-इंजिनियर लेंगे अंतिम निर्णय

बैठक में मंदिर आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा के साथ एल ऐंड टी, टाटा कंसल्टेंट इंजिनियरिंग, आईटीआई चेन्नै, सीबीआरआई रूड़की, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मुम्बई, आईआईटी गुजरात के विशेषज्ञ शामिल थे। बैठक में भूमि की खुदाई कर नींव बनाए जाने के लिए पत्थरों से उसे ठोस करने का निर्णय लिया गया है। जिससे नींव में जहां पर मंदिर का भार अधिक होना होगा, वहां पर अधिक पत्थरों को लगाए जाने के लिए अधिक गहरी खुदाई की जाएगी। जिस पर पूरे मंदिर का भार होगा, हालांकि इस पर टेस्टिंग के बाद आर्किटेक्ट और इंजिनियर मिलकर अंतिम निर्णय लेंगे।

 


Share