कांग्रेस का नेतृत्व करने से हिचक रहे राहुल

कांग्रेस का नेतृत्व करने से हिचक रहे राहुल
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राजस्थान और हरियाणा के मसलों पर निगाहें टिकीं

नई दिल्ली (एजेंसी)। कांग्रेस ने बुधवार की देर रात राजस्थान के सचिवों और महासचिवों की सूची जारी कर दी। इसमें सचिन पायलट और अशोक गहलोत के समर्थकों के बीच संतुलन रखते हुए कुछ निष्पक्ष नेताओं को भी शामिल किया गया है। यह तो बस एक झलक भर है कि समस्या खत्म हो गई जबकि इससे कहीं अधिक मुश्किल मुद्दा तो अभी सुलझना बाकी है। सवाल है कि क्या पायलट जो चाहते हैं, वे वह पा सकेंगे और क्या गहलोत  ऐसा होने देंगे?

नई दिल्ली के करीब सिंघु सीमा पर आंदोलन कर रहे किसानों से कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख और हरियाणा नेता रणदीप सुरजेवाला मिल रहे थे। इसके साथ ही रणदीप ने एक भावपूर्ण वीडियो सीरीज को रिलीज किया। इस वीडियो में किसानों के प्रति उनकी चिंता और सहयोग को साफ देखा जा सकता है। दिलचस्प है कि भूपिंदर हुड्डा कहीं दिखाई नहीं पड़ रहे जबकि वे राज्य में भारतीय जनता पार्टी के विकल्प हो सकते हैं। कांग्रेस पार्टी भी आंदोलन स्थल पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा रही। इस विरोध पर कोई चर्चा भी नहीं करना चाहता, लेकिन सबको पता है कि आने वाले चुनाव में यह मुद्दा छाया रहेगा। ऐसा भी हो सकता है कि खट्टर की घटती लोकप्रियता के बावजूद भाजपा को लाभ मिल जाए।

इन तमाम घटनाओं के बीच राहुल गांधी का इंतजार हो रहा है। कांग्रेस के मुताबिक राहुल अभी छुट्टियां मना रहे हैं। पार्टी के भीतर अध्यक्ष पद को लेकर तैयारियां की जा रही हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हैं कि क्या राहुल एक बार फिर से जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्र कहते हैं कि यह कोई मसला नहीं है। सारे निर्णय राहुल ही कर रहे हैं और अब तो उन्हें बहन का भी साथ मिल गया है। आमतौर हर संकट की घड़ी में वे दोनों ही याद आते हैं।

अभी राजस्थान और हरियाणा की बात करने का खास कारण है। एक में चुनाव होने हैं और दूसरे में गेहलोत और पायलट के बीच विवाद का हल निकाला जाना है। यह कांग्रेस की बहुत पुरानी समस्या है कि उसमें लिए जाने वाले निर्णय पर स्पष्टता की कमी होती है। आमतौर पर ऐसे मामलों में कांग्रेस अपनी खुद की गलतियों के कारण हार जाती है।


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