पंजाब का सबसे असरदार सरदार हुआ ‘बेअसर’

Punjab's most effective chieftain became 'neutral'
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चंडीगढ़ (एजेंसी)। पंजाब लोक कांग्रेस के उम्मीदवार पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को जनता ने घुटने पर ला ही दिया, वह आप उम्मीदवार पूर्व मेयर अजीतपाल सिंह कोहली से 13037 वोटों से हार गए। पंजाब की सियासत में सबसे असरदार सरदार माने जाने वाले कैप्टन आखिर क्यों हार गए? सबसे बड़ा हार का कारण तो सत्ता के बदलाव की लहर ही है। लेकिन, उनकी सबसे बड़ी खामी पिछले साढ़े चार साल का उनका कार्यकाल था, जिससे कई लोगों को यह भरोसा हो गया था कि कैप्टन अमरिंदर का आम लोगों के साथ कोई वास्ता नहीं रहा था। उन्होंने आम जनता के काम को प्राथमिकता नहीं दी। चुनाव परिणामों से करीब तीन दिन पूर्व चेस खेलने वाले कैप्टन को आखिर आप उम्मीदवार को जिताकर उन्हें आम जनता ने सियासी बिसात पर शह और मात दी है।

हालांकि संसद से तीन कृषि कानून पारित वापिस ले लिए गए थे, लेकिन लगभग पूरे ग्रामीण इलाकों में भाजपा को लेकर काफी नाराजगी थी। कांग्रेस में अपने खिलाफ बगावत होने के बाद जब उन्होंने भाजपा से हाथ मिलाया, तो उन पर साढ़े चार साल के खराब प्रदर्शन के साथ-साथ किसान विरोधियों के साथ गठजोड़ करने के आरोप भी लगाए गए। दूसरा उनके खिलाफ यह भी प्रचार किया जाता रहा कि वह अपने सिसवां फार्म हाउस में शाही अंदाज में पार्टियां करने में ज्यादा व्यस्त रहते थे। किसान के आक्रोश  के विरूद्ध उनका भाजपा से हाथ मिलाना भी उनकों बहुत मंहगा पड़ा। कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के हितों की रक्षा करने वाली हस्ती के रूप में जाने जाते हैं। वे अपनी मुखरता और विचारों के लिए जाने जाते हैं। बात चाहे ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में 1984 में सांसद और अपनी ही पार्टी से इस्तीफा देने की हो या राज्य के पानी के मुद्दे पर 2004 में पंजाब विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित कराया हो। अब 85 साल के कैप्टन का यह आखिरी चुनाव ही माना जा रहा है। लंबी सियासी पारी में कई चुनाव जीत चुके कैप्टन राजनीति के आखिरी पड़ाव में हारे यह अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है।


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