3 मई के बाद 15 दिन कफ्र्यू बढ़ाने की तैयारी – राजस्थान में जारी रहेंगी लॉकडाउन जैसी पाबंदियां

महाराष्ट्र में 15 दिनों के लॉकडाउन की संभावना, आज टास्क फोर्स के साथ बैठक
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जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। राजस्थान में कफ्र्यू लगने के बाद भी कोरोना मामलों में कमी नहीं आई है। कोरोना के मामले 12 दिन में ही ढाई गुना हो चुके हैं। कोरोना की इस रफ्तार को देखते हुए राजस्थान सरकार अब कोरोना कफ्र्यू कम लॉकडाउन को 15 दिन तक बढ़ाने पर विचार कर रही है। एक्सपर्ट ने 15 दिन के सख्त कफ्र्यू कम लॉकडाउन का सुझाव दिया है। राजस्थान में 3 मई तक मिनी लॉकडाउन है। 3 मई के बाद भी लॉकडाउन जैसी पाबंदियों को कम से कम 15 दिन और बढ़ाने की तैयारी है। ऐसे में 18 मई तक मौजूदा लॉकडाउन जैसी पाबंदियां बढऩा तय माना जा रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की नियमित कोरोना समीक्षा बैठकों में कोर ग्रुप में शामिल अफसरों ने कफ्र्यू में लगी पाबंदियों की सख्ती से पालना करवाने पर जोर दिया है। केंद्र सरकार ने भी ज्यादा मामलों वाले क्षेत्रों में लॉकडाउन का सुझाव दिया है। राजस्थान में 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने वीकेंड कफ्र्यू लगाने का फैसला किया। इसके बाद 18 अप्रैल को 19 अप्रैल से 3 मई तक पूरे प्रदेश में कफ्र्यू लगाकर लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगाईं। बीच में गाइडइलाइन में संशोधन कर पाबंदियों को और बढ़ाया गया।

एक्सपर्ट बोले : कफ्र्यू आगे बढ़ाना ही होगा, इसके अलावा कोई रास्ता नहीं

राजस्थान के जाने-माने श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र सिंह का कहना है-जिस तरह से कोरोना के केस आ रहे हैं, उस हिसाब से कफ्र्यू बढ़ाना ही होगा। इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है। लोग भी अनुशासन में रहें और एक मूल मंत्र अपना लें- मास्क को वस्त्रों की तरह अपनाएं, जिस तरह हम पूरे समय वस्त्र पहने रहते हैं उसी तरह मास्क को अपनाना होगा।

कफ्र्यू आगे बढ़ाने पर फैसला जल्द : 1 या 2 मई को नई गाइडलाइन

एक्सपर्ट की राय के बाद सरकार में कफ्र्यू को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकों में भी लगातार यही विचार आ रहा है। रात को हुई समीक्षा बैठक में गृह विभाग के प्रमुख सचिव अभय कुमार ने कफ्र्यू के सख्ती से पालन पर जोर दिया। कोर ग्रुप के एक्सपर्ट ने केस काबू होने तक सख्त पाबंदियां जारी रखने का सुझाव दिया है। 1 या 2 मई को गृह विभाग नई गाइडलाइन जारी करेगा।

पहले वीकेंड कफ्र्यू के दिन 17 को 60 हजार एक्टिव केस थे, अब 12 दिन में ही 1.63 लाख को पार कर चुके

राजस्थान में पहले वीकेंड कफ्र्यू से लेकर अब तक 12 दिन में ही रोजाना मिलने वाले कोरोना पॉजिटिव लगभग ढाई गुने से ज्यादा होगा। एक्टिव केस 17 अप्रैल को 59,999 थे जो अब 1.63 लाख पार कर चुके हैं। राजस्थान में 17 अप्रैल से वीकेंड कफ्र्यू और 19 अप्रैल से नियमित कफ्र्यू कम लॉकडाउन लागू है।

17 अप्रैल को प्रदेश में 9046 कारोना पॉजिटिव आए थे और उस समय कुल 60 हजार एक्टिव केस थे। 28 अप्रैल को राजस्थान में 16,613 कोरोना केस आए और कुल एक्टिव केस की संख्या 163,372 पहुंच गई। एक्टिव केस 12 दिन में ढाई गुने से ज्यादा हो चुके हैं।

अब कोरोना के गंभीर मरीजों का ही अस्पतालों में होगा इलाज

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के अस्पतालों में बढ़ते दबाव और गंभीर मरीजों को सुविधाएं नहीं मिलने के कारण अस्पतालों के लिए नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। इस नई गाइडलाइन के मुताबिक अस्पतालों में गंभीर कोविड संक्रमित मरीजों का इलाज होगा। चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गालरिया ने इस संबंध में वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सकां से विचार विमर्श कर दिशा निर्देश जारी किए हैं। एसएमएस प्रिंसिपल डॉ. सुधीर भंडारी ने बताया कि हल्के लक्षण या लक्षण रहित कोविड के रोगियों का घर पर ही उपचार सम्भव है। इन रोगियों की समय-समय पर घर पर रक्त में ऑक्सीजन स्तर की जांच पल्स ऑक्सीमीटर द्वारा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यम या गम्भीर लक्षण वाले रोगियों में यदि ऑक्सीजन लेवल 90 प्रतिशत से अधिक है तो उनकी भी समय-समय पर घर पर ही मॉनिटरिंग की जाए। स्थिति में बदलाव या स्थिति गम्भीर होने पर तुरन्त चिकित्सक की निगरानी में उपचार कराया जाए।

डॉक्टर ने दी रोगियों को सलाह

डॉ. भंडारी ने बताया कि श्वास लेने में तकलीफ होने, सीने में दर्द, चक्कर आने, मानसिक स्थिति में बदलाव आने की स्थिति में रोगी का चिकित्सक की निगरानी में उपचार कराया जाए। खून में थक्के जमने की संभावना या इंफ्लेमेटरी मारकर्स में  अत्यधिक वृद्धि होने पर रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराया जाएग। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा कि मरीज की क्लीनिकल स्थिति, ऑक्सीजन लेवल एवं इंफ्लेमेटरी मारकर्स के आधार पर पिछले 48 घंटे में रोगी की स्थिति स्थिर रहने और बीमारी नहीं बढऩे के लक्षण हो तो उसका घर पर ही खयाल रखा जा सकता है। रोगी का कमरे की हवा में श्वास लेते हुए ऑक्सीजन लेवल निरन्तर 90 प्रतिशत से अधिक हो। उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों को कोविड की आरटी-पीसीआर टेस्ट नेगेटिव रिपोर्ट डिस्चार्ज के लिए आवश्यक नहीं है।


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