Saturday , 23 June 2018
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20 आप विधायक नपे

ईसी की सिफारिश पर राष्ट्रपति की मुहर

नई दिल्ली। दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को राष्ट्रपति से भी बड़ा झटका लगा है। चुनाव आयोग के बाद राष्ट्रपति ने भी आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया है।
बता दें कि चुनाव आयोग ने लाभ का पद के मामले में दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया था। इसके बाद आप ने चुनाव आयोग की सिफारिश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, जहां हाई कोर्ट ने आप के विधायकों को निर्वाचन आयोग की सिफारिश के खिलाफ अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया था।
दरअसल, दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने 2015 में आप पार्टी के 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था। इसके बाद प्रशांत पटेल नाम के वकील ने लाभ का पद बताकर राष्ट्रपति के पास शिकायत करते हुए इन विधायकों की सदस्यता खत्म करने की मांग की थी। हालांकि विधायक जनरैल सिंह के पिछले साल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद इस मामले में फंसे विधायकों की संख्या 20 हो गई थी।
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ए के ज्योति अपने रिटायरमेंट से पहले सारे पेंडिंग केस खत्म करना चाह रहे हैं, इसलिए आयोग फटाफट पुराने मामलों का निपटारा कर रहा है। वह 22 को रिटायर हो जाएंगे। हालांकि सत्ताधारी पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग इसका फैसला नहीं कर सकता, इसका फैसला अदालत में किया जाना चाहिए। पार्टी ने कहा कि विधायकों का पक्ष नहीं सुना गया। संविधान के अनुसार संसद या फिर विधानसभा का कोई सदस्य अगर लाभ के किसी पद पर होता है तो उसकी सदस्यता जा सकती है। यह लाभ का पद केंद्र और राज्य किसी भी सरकार का हो सकता है। इस फैसले पर भाजपा सांसद मिनाक्षी लेखी ने कहा कि 20 विधायकों को संविधान के मुताबिक अयोग्य करार दिया गया है। ऐसा लगता है कि सत्ता में कुछ ऐसे लोग आ गए हैं जिन्हें शासन-प्रशासन की जानकारी नहीं है।
वहीं कांग्रेस ने फैसले में देरी करने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि अगर 22 दिसंबर से पहले यह फैसला लिया जाता तो आम आदमी पार्टी टूट जाती। तीन हफ्ते तक देरी क्यों की गई। 19 जनवरी को सिफारिश कर इनकी मदद की गयी है। हमने पूरी लिस्ट दी है कि कैसे पीडब्लूडी ने इनके ऑफिस पर खर्च किया इनके बिजली पानी का बिल दिया। इनको सरकार में रहने का कोई नैतिक आधार नहीं है।

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