प्र.म. ने संत तुकाराम शिला मंदिर का लोकार्पण  किया, ‘जो भंग न हो, वही अभंग है’, मोदी ने किया सावरकर का जिक्र, कहा- हथकडिय़ां बजा गाते थे अभंग

प्र.म. ने संत तुकाराम शिला मंदिर का लोकार्पण  किया, 'जो भंग न हो, वही अभंग है’, मोदी ने किया सावरकर का जिक्र, कहा- हथकडिय़ां बजा गाते थे अभंग
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पुणे (एजेंसी)। प्र.म. नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पुणे के देहू में संत तुकाराम महाराज मंदिर का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में सबसे दुर्लभ संतों का सत्संग है। यदि संतों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ तो ईश्वर की अनुभूति अपने आप हो जाती है। मोदी ने कहा कि यहां का जन-जन भक्ति से ओत-प्रोत है और संत स्वरूप है। प्र.म. मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे राष्ट्रनायक के जीवन में भी तुकाराम जी जैसे संतों ने बड़ी अहम भूमिका निभाई। आजादी की लड़ाई में वीर सावरकर जी को जब सजा हुई, तब जेल में वो हथकडिय़ों को चिपली जैसा बजाते हुए तुकाराम जी के अभंग गाते थे।

उन्होंने कहा कि संत तुकाराम जी की दया, करूणा और सेवा का वो बोध उनके ‘अभंगों’ के रूप आज भी हमारे पास है। इन अभंगों ने हमारी पीढिय़ों को प्रेरणा दी है। जो भंग नहीं होता, जो समय के साथ शाश्वत और प्रासंगिक रहता है, वही तो अभंग है। उन्होंने कहा कि भारत शाश्वत है, क्योंकि भारत संतों की धरती है। हर युग में हमारे यहां, देश और समाज को दिशा देने के लिए कोई न कोई महान आत्मा अवतरित होती रही है। आज देश संत कबीरदास की जयंती मना रहा है। हमें गर्व है कि हम दुनिया की प्राचीनतम जीवित सभ्यताओं में से एक हैं। इसका श्रेय अगर किसी को जाता है तो वो भारत की संत परंपरा को, भारत के ऋषियों मनीषियों को है।

जो भंग न हो, वही तो अभंग है – तुकाराम के संदेशों पर बोले मोदी : प्र.म. ने कहा, मुझे आज उस शिला मंदिर की स्थापना में आने का अवसर मिला है। इसी शिला पर 13 सालों तक संत तुकाराम ने तपस्या की थी। मोदी ने कहा कि भारत शाश्वत है क्योंकि यह संतों की धरती है। हमारे यहां समय-समय पर संतों ने अवतार लिया है ताकि भारत को गतिशील बनाए रखें। संत तुकाराम ने अकाल जैसा दौर देखा और संकट में लोगों की मदद की। अपने परिवार की संपत्ति को भी उन्होंने लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया था। संत तुकाराम जी की दया, करूणा और सेवा का बोध हमारे पास है। उन्होंने तुकाराम के अभंगों का विश्लेषण करते हुए कहा कि जो भंग नहीं होता है और समय के साथ शाश्वत रहता है, वही तो अभंग होता है।

संत तुकाराम ने दिया था, अंत्योदय का मंत्र, हम उसी पर चल रहे : प्र.म. मोदी ने कहा कि संत तुकाराम कहते थे कि ऊंच-नीच का भेदभाव और इंसान के बीच में फर्क करना बहुत बड़ा पाप है। यह संदेश भगवान की भक्ति के साथ ही राष्ट्र और समाज की भक्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है। आज देश इसी नीति पर चलते हुए सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की राह पर है। तुकाराम कहते थे कि समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे लोगों को अपनाना ही संतों का लक्षण है। आज देश इसी अंत्योदय की राह पर है और सभी को साथ लेकर चल रहा है। दलित, पिछड़ा और वंचित का कल्याण आज पहली प्राथमिकता है। संत अपने आप में ऐसी ऊर्जा के तौर पर होते हैं, जो संकट में साथ देने के लिए आगे आते हैं। महाराज शिवाजी के जीवन में भी संत तुकाराम की अहम भूमिका थी।

पुरातन पहचान को रखें चैतन्य  : प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमारी राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए हमारा दायित्व है कि हम अपनी प्राचीन पहचान और परम्पराओं को चैतन्य रखें। आज जब आधुनिक टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर भारत के विकास का पर्याय बन रहे हैं तो हम ये सुनिश्चित करें कि विकास और विरासत दोनों एक साथ आगे बढ़ें। प्र.म. ने कहा, संत तुकाराम कहते थे कि समाज में ऊंच नीच का भेदभाव बहुत बड़ा पाप है। उनका ये उपदेश राष्ट्रभक्ति और समाजभक्ति के लिए महत्वपूर्ण है।

350 किमी से अधिक लंबाई के बनेंगे हाईवे: प्र.म. मोदी ने कहा, कुछ महीनें पहले ही मुझे पालकी मार्ग में दो राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन करने के लिए शिलान्यास का अवसर मिला था। श्री संत ज्ञानेश्वर महाराज पालकी मार्ग का निर्माण पांच चरणों में पूरा होगा। वहीं संत तुकाराम पालकी मार्ग का निर्माण तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। उन्होंने बताया इन सभी चरणों में 350 किमी से अधिक लंबाई के हाईवे बनेंगे और इस पर 11 हजार करोड़ रूपए से अधिक खर्च किया जाएगा।


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