930 कंपनियों ने छिपाए 20,353 करोड़,  पता चलने पर सरकार ने टैक्स वसूला, क्रिमिनल कंप्लेंन भी फाइल की

Panama and Paradise Papers leak case
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पनामा और पैराडाइज पेपर लीक मामला : राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने दी जानकारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। पनामा और पैराडाइज पेपर लीक में भारत से जुड़ी 930 कंपनियों के 20,353 करोड़ रूपए का पता चला है। मंगलवार को राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इसकी जानकारी दी। पंकज चौधरी ने कहा कि इन पैसों का पता चलने के बाद 153.88 करोड़ रूपए का टैक्स वसूला गया है। ये डेटा 1 अक्टूबर 2021 तक का है।

टैक्स डिपार्टमेंट की कार्रवाई

पंकज चौधरी ने कहा, टैक्स डिपार्टमेंट उन व्यक्तियों पर कार्रवाई करता है, जो आयकर विभाग के नियमों के उल्लंघन में शामिल पाए जाते हैं। इन नियमों में इनकम टैक्स एक्ट 1961, ब्लैक मनी (अनडिस्क्लोज्ड फॉरेन इनकम एंड एसेट्स) एंड इंपोजिशन ऑफ टैक्स एक्ट, 2015 शामिल है।

उन्होंने कहा, डायरेक्ट टैक्स लॉ के तहत इस तरह की कार्रवाइयों में तलाशी और जब्ती, सर्वे, पूछताछ, इनकम का असेसमेंट और रिएसेसमेंट, ब्याज के साथ टैक्स लगाना, पेनाल्टी लगाना, क्रिमिनल कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दर्ज करना शामिल है।

52 मामलों में क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंन

पनामा और पैराडाइज पेपर लीक के 52 मामलों में, ब्लैक मनी (अनडिस्क्लोज्ड फॉरेन इनकम एंड एसेट्स) एंड इंपोजिशन ऑफ टैक्स एक्ट, 2015 के तहत क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंन फाइल की गई हैं। इसके अलावा, 130 मामलों में इस एक्ट के तहत प्रोसीडिंग्स शुरू की गई है।

तेजी से जांच के लिए एमजीए के तहत लाए गए मामले

पेंडोरा पेपर्स लीक से जुड़े कुछ भारतीयों के नाम मीडिया में आए है। चौधरी ने कहा कि सरकार ने इसका संज्ञान लिया है जांच में तेजी लाने के लिए इसे मल्टी एजेंसी ग्रुप (एमजीए) के तहत लाया गया है। एमजीए का गठन सीबीडीटी के चेयरमैन के कन्वीनर-शिप में किया गया है।

एमजीए की मेंबर एजेंसी में एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट और सीबीडीटी की फॉरेन टैक्स एंड टैक्स रिसर्च डिवीजन है।


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