आर्टिकल 370 के खात्मे से कराह रहा पाकिस्तान -अब हुर्रियत को लीड कौन करेगा

आर्टिकल 370 के खात्मे से कराह रहा पाकिस्तान
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श्रीनगर (एजेंसी)। हुर्रियत कांफ्रेंस का नेतृत्व करने के लिए पाकिस्तान एक नई अलगाववादी आवाज ढूंढने की पूरी कोशिश में लगा है। जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस (एपीएचसी) से इस्तीफा के बाद से ही पाकिस्तान अब नया चेहरा ढूंढ रहा है। कई सरकारी और सुरक्षा अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

साल 1993 में गठित इस अलगाववादी निकाय ने कश्मीर में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, मगर पिछले साल 5 अगस्त को राज्य का विशेष दर्जा खत्म करने और दो केंद्र शासित प्रदेश में बांटने के फैसले के बाद से यह संगठन काफी हद तक कमजोर और निष्क्रिय हो गया है।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान युवा नेताओं की तलाश कर रहा है और उन लोगों को मनाने की कोशिश कर रहा है जो लश्कर-ए-तैय्यबा जैसे आतंकी समूहों सहित उग्रवादी संगठनों का हिस्सा रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान अब एक नई टीम बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है।

बता दें कि पिछले एक साल में हुर्रियत नेताओं से लेकर आम जनता तक को कोई दिशा-निर्देश नहीं दिया गया है। जून में 91 वर्षीय एसएएस गिलानी जो अलगाववादी समूह के आजीवन अध्यक्ष थे, ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा देकर सबको हैरान कर दिया था। दरअसल, ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस दो धड़ों में बंटा हुआ है, एक जिसका नेतृत्व गिलानी करते थे और दूसरे का मीरवाइज उमर फारूक। मीरवाइज उमर फारूक की अध्यक्षता वाली समानांतर संस्था भी करीब एक साल से चुप है।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि कश्मीर में केंद्र सरकार के विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने के फैसले पर गुस्सा और नाराजगी जताने के लिए पाकिस्तान नए चेहरों की तलाश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल लॉ से भी पाकिस्तान को बहुत बेचैनी है। गौरतलब है कि 5 अगस्त को राज्यसभा ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश में बांटने के प्रस्ताव को पास किया था।

दरअसल, हुर्रियत अतीत में कई आंदोलन में सबसे आगे रहा है और गिलानी और मीरवाइज के नेतृत्व वाले दोनों गुटों ने विरोध कैलेंडर जारी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, राज्य से आर्टिकल 370 खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश में बांटने के फैसले से पहले ही ज्यादातर अलगाववादी नेताओं हाउस अरेस्ट किया गया और फिलहाल ये अभी कोई विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने में सक्षम नहीं दिख रहे हैं।

मीरवाइज उमर फारूक की अगुवाई वाले हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने लगभग एक साल बाद अपनी चुप्पी तोड़ी, जब जुलाई में इसने एक बैठक की और भारत, पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के लोगों के बीच बातचीत के जरिए कश्मीर समस्या को हल करने का आह्वान किया। गिलानी के इस्तीफा देने और उनके सहयोगियों पर निष्क्रियता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के कुछ दिनों के बाद यह बैठक आयोजित की गई। बैठक के तुरंत बाद एक बयान जारी किया गया जिसमें मीरवाइज गुट ने ‘कश्मीर संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधानÓ की दिशा में काम करने की कसम खाई।

गिलानी ने अपने त्याग पत्र में अपने अलगाववादी साथियों पर कुनबा परस्ती और राजनीतिक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और अन्य अलगाववादी नेताओं पर 5 अगस्त के फैसले के खिलाफ प्रतिक्रिया न देने को लेकर निशाना साधा। बता दें कि हुर्रियत में कई लोगों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा भी की जा रही है।


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