भारत के लिए बेहद खास है ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की कोवीशील्ड वैक्सीन

भारत के लिए बेहद खास है ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की कोवीशील्ड वैक्सीन
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भारत में जैसे-जैसे सर्दी अपने चरम पर पहुंची रही हैं वैसे-वैसे ही भारत के कई राज्यों में कोरोना संक्रमण की दूसरी और तीसरी लहर की शुरुआत हो गई हैं। कोरोना की यह लहर पहले से ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसमें संक्रमितों की संख्या चाहे कम हो लेकिन प्रतिदिन मरने वालों कि संख्या पहले से ज्यादा हैं और ‘जान है तो जहाँ है’ का मंत्र फेल होता दिख रहा है। संकट के इस समय में कोरोना वैक्सीन को लेकर अच्छी खबर भी समाने आई है पिछले 2 सप्ताह में अमेरिका की फाइजर और मॉडर्ना कंपनी ने कोरोना वैक्सीन के 90-95 फीसदी तक सफल होने का दावा किया हैं।

इस लिस्ट  में अब ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की ओर से बनाई गई कोवीशील्ड वैक्सीन का नाम भी शामिल हो गया है। ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका ने दावा किया है कि उनकी बनाई गई वैक्सीन 90 फीसदी तक कारगर साबित हुई हैं। ब्रिटेन में हुए ट्रायल में 12,390 वॉलेंटियर्स पर वैक्सीन का ट्रायल किया गया। इन्हें दो डोज दिए गए। पहले हॉफ डोज दिया और फिर फुल डोज। ब्राजील में 10,300 वॉलेंटियर्स पर ट्रायल किया गया। इन ट्रायल के अधार पर कोवीशील्ड का पहला डोज 62 फीसदी असरदार हुआ तो दूसरी डोज 90 फीसदी तक सफल रहा । वैक्सीन की एक और खास बात यह है कि इसको कोल्ड स्टोरेज में 2 से 8 डिग्री के तापमान पर लगभग 6 महीने के लिए स्टोर किया जा सकता है।

कोवीशाल्ड का सफल होना भारत के लिए खुशखबरी जैसा है क्योंकि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका ने इस वैक्सीन का मैन्युफैक्चरिंग कॉन्ट्रेक्ट भारत की सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया को दिया है यानी कोवीशील्ड वैक्सीन भारत में ही निर्मित होगी। भारत में निर्मित होने का फायदा भारत को मिलेगा। सीरम इंस्टिट्यूट भी इस वैक्सीन का फेज-3 का ट्रायल कर रहा है जिस पर अच्छी खबर 2021 के शुरुआत में मिल सकती है। वैक्सीन के करीब 40-50 कारोड़ डोज का ऑर्डर तो भारत ने पहले ही दे दिया हैं। सीरम इंस्टिट्यूट ने कहा है कि फेज-3 का ट्रालय सफल होने के बाद हम जनवरी 2021 से हर महीने वैक्सीन का 5-6 करोड़ डोज बनाने लगेंगे। 2021 में वैक्सीन की करीब 1 अरब से ज्यादा डोज भारत को जरुरत पड़ेगी और अब वैक्सीन के लिए कोल्ड स्टोरेज बनाने से लेकर वैक्सीन को कितने चरण में और सबसे पहले किन लोगों को वैक्सीन दी जाए इस ओर काम करना हैं। वैक्सीन का डिस्ट्रीब्यूशन सही से हो सके और भारत के अंतिम व्यक्ति तक वैक्सीन पहुंच सके इसको लेकर भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रीयों से बातचीत का दौर शुरु गया है।

कोवीशील्ड वैक्सीन का भारत में निर्मित होना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी। वैक्सीन एक मेड इन इंडिया होगी जो वोकल के लिए लोकल के संदेश को पूरा करेगी और साथ में ही आत्मनिर्भर भारत के लिए बहुत बड़ा कदम होगा। कोवीशील्ड वैक्सीन से इस वैश्विक बीमारी में भारत दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाएगा। इन सभी बातों से इतर अभी के हालतों को देखते हुए अगर सर्दी में कोरोना का ग्राफ तेजी से बढ़ाता है तो सीरम इंस्टिट्यूट ने पहले ही बताया दिया है कि इमरजेंसी कि स्थिति में हम वैक्सीन को साल के अंत में बाजार में पहुंचा सकते हैं।


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