दलितों- पिछड़ों- महिलाओं को मंत्री नहीं देखना चाहता विपक्ष – नए मंत्रियों का परिचय नहीं करा पाए प्र.म.

मोदी ने कोसी महासेतु समेत 12 रेल परियोजनाएं बिहार को सौंपी
Share

नई दिल्ली (एजेंसी)। विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को मानसून सत्र के पहले दिन मंत्रिपरिषद के नए सदस्यों का परिचय दोनों सदनों में नहीं करवा पाए। उन्होंने मंत्रियों की सूची दोनों सदनों के पटल पर रखी। प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कुछ लोगों को यह रास नहीं आ रहा है कि दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग और महिला मंत्रियों का यहां परिचय कराया जाए। उन्होंने विपक्षी दलों के रवैये को महिला एवं दलित विरोधी ‘मानसिकता का परिचयÓ करार दिया।

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी ने जब नए मंत्रियों का सदन में परिचय देना शुरू किया, उसी दौरान दोनों सदनों में विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया। राज्यसभा के सभापति एम वैंकेया नायडू एवं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से शांत होने और मंत्रियों का परिचय होने देने की अपील की। किंतु उनकी अपील का विपक्षी सदस्यों पर कोई असर नहीं हुआ और सदन में हंगामा जारी रहा।

बिरला ने कहा, परंपराओं को न तोड़ें। आप लंबे समय तक शासन में रहे हैं। आप परंपरा को तोड़कर सदन की गरिमा को कम नहीं करें। इस सदन की गरिमा को बनाए रखें…प्रधानमंत्री जी सदन के नेता हैं और फेरबदल के बाद मंत्रिपरिषद का परिचय करा रहे हैं। आप सदन की गरिमा को बनाए रखें। लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से शांति से नए मंत्रियों का परिचय होने देने की अपील की।

निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा…

विपक्ष के हंगामे पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, मैं सोच रहा था कि सदन में एक उत्साह का वातावरण होगा क्योंकि बड़ी संख्या में हमारी महिला सांसद मंत्री बनी हैं… आज खुशी का माहौल होगा कि आदिवासी साथी बड़ी संख्या में मंत्री बने हैं। किसान परिवार और ग्रामीण परिवेश से आने वाले, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समाज से आने वालों को बड़ी संख्या में मंत्रिपरिषद में स्थान मिला है, उनके परिचय से खुशी होनी चाहिए थी।

मोदी ने कहा, दलित मंत्री बनें, महिला मंत्री बनें, ओबीसी मंत्री बनें, किसान परिवारों के लोग मंत्री बनें…शायद यह बात कुछ लोगों को रास नहीं आ रही है इसलिए वह उनका परिचय भी नहीं होने देते। प्रधानमंत्री ने उच्च सदन में प्रश्न किया, यह कौन सी मानसिकता है कि आदिवासी के बेटे, दलित के बेटे और किसान के बेटे को गौरव देने को लोग तैयार नहीं हैं?निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा…


Share