‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ चला सेना ने दी चीन को मात

'ऑपरेशन स्नो लेपर्ड' चला सेना ने दी चीन को मात
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नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत और चीन की सेनाएं इस वक्त लद्दाख सीमा पर आमने-सामने हैं। पिछले करीब पांच महीने से बॉर्डर पर तनाव की स्थिति है। शुरूआत में चीन ने कई बार घुसपैठ की कोशिश की, लेकिन अब बॉर्डर पर पासा पूरी तरह से पलट चुका है। इसका कारण बना है भारतीय सेना का ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’, जिसने चीन की हर चाल को बेनकाब कर दिया है।

चीन ने जब सीमा पर घुसपैठ की कोशिश की, उस दौरान सेना ने तीन महीने तक इंतजार किया, लेकिन सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे और कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने इस ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ को मंजूरी दे दी। इस ऑपरेशन के तहत एलएसी के पास रणनीतिक तौर पर मजबूत पहाडिय़ों की पहचान की गई। इन पहाडिय़ों के दम पर सीमा पर भारत को ना सिर्फ युद्ध की परिस्थितियों के लिए मदद मिली, बल्कि सामरिक तौर पर चीन से कुछ कदम आगे बढ़ा दिया। जब ऑपरेशन को अंजाम देने की बारी आई तो ऐसी टीम का गठन किया गया, जो ऊंची पहाडिय़ों में लडऩे में सक्षम हो।

हर टीम को पहाड़ी पर कब्जा करने और सप्लाई चेन को सुचारू रूप से जारी रखने का टास्क दिया गया। इसी ऑपरेशन के दौरान सेना ने पैंगोंग लेक पर साउथ, नॉर्थ इलाके में कब्जा जमाया, साथ ही बॉर्डर की कुछ अन्य महत्वपूर्ण जगहों पर अपनी पैठ बना ली। इस मिशन के बाद अब सेना की स्पेशल फोर्स सीमा पर कमांडिंग पॉजिशन में है, जहां पर तनाव की स्थिति थी। सेना की ओर से कोशिश की गई कि चीनी सेना की पॉजिशन और पेट्रोलिंग साइट को डोमिनेट किया जाए। अब अगर एलएसी पर बातचीत सफल नहीं होती है, तो उसके लिए सेना ने तैयारी की है। सेना की ओर से बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर दी गई है, ताकि अप्रैल से पहले की स्थिति को दोबारा हासिल किया जा सके। एलएसी पर सिर्फ पैंगोंग या डेमचोक इलाके में ही नहीं बल्कि दौलत ओल्डी, देपसांग जैसे इलाकों में भी बड़ी संख्या में मौजूदगी है। भारतीय सेना का साथ देने के लिए वायुसेना भी मुस्तैद है। यानी अब बात कब करनी है ये चीन को तय करना है। अब भारत चाहे तो चीन से अपनी शर्तों पर बात कर सकता है।

यही कारण है कि चीनी कमांडर की ओर से अब तक अगली बातचीत का वक्त नहीं तय किया गया है क्योंकि ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दम पर भारत ने चीन का खेल बिगाड़ दिया है। बता दें कि बीते दिन ही देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में चीन के साथ विवाद पर बयान दिया था। राजनाथ सिंह ने कहा था कि बीते कुछ वक्त में चीन ने कई बार समझौतों का उल्लंघन किया है और एलएसी की स्थिति को बदलने की कोशिश की है, लेकिन भारत इस पर राजी नहीं है, भारत बातचीत से मुद्दा सुलझाना चाहता है लेकिन हर परिस्थिति के लिए तैयार है।


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