14 अगस्त को भारत मनाएगा विभाजन विभीषका स्मृति दिवस- प्र.म. मोदी बोले- भूल नहीं सकते बंटवारे का दर्द

11 को सभी सीएम के साथ बैठक करेंगे मोदी
Share

नई दिल्ली (एजेंसी)। 14 अगस्त 1947 को देश ने बंटवारें का दर्द झेला था। पाकिस्तान जहां इसे अपनी आजादी के दिन के रूप में मनाता हैं वहीं, देश में अभी भी हजारों लोग हैं जिनके दिलों में बंटवारे का जख्म और दर्द आज भी ताजा है। लाखों लोग अपना घर, परिवार और रिश्तेदार को छोड़कर भारत से पाकिस्तान और वहां से यहां आए। 14 अगस्त के मौके पर प्र.म. मोदी ने बंटवारे को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त की।

‘बंटवारे के दर्द को कभी भुला नहीं सकते

प्र.म. मोदी ने कहा कि देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी। उन लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवसÓ के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया है। प्र.म. मोदी ने कहा, ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवसÓ का यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को खत्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएं भी मजबूत होंगी।

उपमहाद्वीप के साथ बंगाल का भी विभाजन

देश के इतिहास में 14 अगस्त की तारीख आंसुओं से लिखी गई है। यही वह दिन था जब देश का विभाजन हुआ और 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान तथा 15 अगस्त, 1947 को भारत को एक पृथक राष्ट्र घोषित कर दिया गया। इस विभाजन में न केवल भारतीय उप-महाद्वीप के दो टुकड़े किये गये बल्कि बंगाल का भी विभाजन किया गया।

दिल…परिवार…रिश्तों का बंटवारा

बंगाल के पूर्वी हिस्से को भारत से अलग कर पूर्वी पाकिस्तान बना दिया गया, जो 1971 के युद्ध के बाद बांग्लादेश बना। कहने को तो यह एक देश का बंटवारा था, लेकिन दरअसल यह दिलों का, परिवारों का, रिश्तों का और भावनाओं का बंटवारा था। भारत मां के सीने पर बंटवारे का यह जख्म सदियों तक रिसता रहेगा और आने वाली नस्लें तारीख के इस सबसे दर्दनाक और रक्तरंजित दिन की टीस महसूस करती रहेंगी।

13 लाख लोग मारे गए, एक लाख महिलाओं से रेप

देश के बंटवारे के समय करीब 90 लाख शरणार्थी पंजाब से पाकिस्तान गए थे। विभाजन के तीन साल बाद 1950 तक उत्तर प्रदेश से चार हजार मुसलमान हर रोज पाकिस्तान जाने वाली ट्रेन में बैठकर जाते रहे। बंटवारे की त्रासदी का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस दौरान 13 लाख लोग मारे गए। इसके अलावा 1.5 करोड़ विस्थापित हुए। बंटवारे का दर्द लेकर 12.5 लाख शरणार्थी भारत में आए। इस दौरान सबसे दिल दहलाने वाली घटनाएं महिलाओं के साथ हुई। बंटवारे के दौरान अनुमान के अनुसार 1 लाख महिलाओं के साथ रेप हुआ।


Share