तेल की कीमतों में फिर लगी आग, 7 दिन में 5वीं बार बढ़े भाव, पेट्रोल 55 और डीजल 57 पैसे हुआ महंगा

Oil prices caught fire again, prices increased for the 5th time in 7 days, petrol 55 and diesel became costlier by 57 paise
Share

जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। देशभर में चुनावी सीजन खत्म होने के साथ ही पेट्रोल और डीजल की कीमत में आग लग गई है। पिछले 1 सप्ताह में 5 बार पेट्रोल और डीजल की कीमत में इजाफा हुआ है। इसके बाद रविवार को जयपुर में पेट्रोल प्रति लीटर की कीमत 55 पैसे बढ़कर 111 रूपए 11 पैसे पहुंच गई। जबकि डीजल प्रति लीटर की कीमत 57 पैसे बढ़कर 94 रूपए 54 पैसे प्रति लीटर पर पहुंच गई है। इससे पहले सोमवार को पेट्रोल 87 और डीजल 88 पैसे, मंगलवार को पेट्रोल 82 और डीजल 65 पैसे गुरूवार को पेट्रोल 88 और डीजल 82 पैसे और शनिवार को पेट्रोल 87 और डीजल 80 प्रति लीटर महंगा हुआ था। ऐसे में लगातार बढ़ते तेल के दामों ने आम आदमी के घर का बजट बिगाड़ दिया है।

धीरे-धीरे बढ़ेंगे दाम : राजस्थान पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अनिल शर्मा ने बताया कि भारत के टॉप फ्यूल रिटेलर्स आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल को नवंबर से मार्च के बीच करीब 2.25 अरब डॉलर (19 हजार करोड़ रूपए) के रेवेन्यू का नुकसान हुआ है। ऐसे में चुनावी सीजन ख़त्म होने के साथ ही अब सरकार रिफाइनर को नुकसान से बचाने के लिए कीमतें बढ़ाने की अनुमति देगी। ऐसे में अलगे कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 से 20 रूपए तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके लिए एक साथ बढ़ोतरी ना कर के धीरे-धीरे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जाएंगे।

पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाया जाए

राजस्थान पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनीत बगई ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत लाने से बहुत मदद मिलेगी। यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह रोज-रोज कीमतें बढ़ रही है, उस पर लगाम लगाने के लिए अब जीएसटी के तहत पेट्रोल-डीजल को लाना होगा।

टैक्स के बाद दोगुने से ज्यादा महंगा हो जाता है पेट्रोल

पेट्रोल का बेस प्राइस 49 रूपए के करीब है। इस पर केंद्र सरकार 27.90 रूपए एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है। इसके बाद राज्य सरकारें इस पर अपने हिसाब से वैट और सेस वसूलती हैं। दाम बेस प्राइस से 3 गुना तक बढ़ गया है। ऐसे में बिना टैक्स में राहत दिए पेट्रोल के दाम कम कर पाना मुमकिन नहीं है।

कैसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?

जून 2010 तक सरकार पेट्रोल की कीमत निर्धारित करती थी। हर 15 दिन में इसे बदला जाता था। 26 जून 2010 के बाद सरकार ने पेट्रोल की कीमतों का निर्धारण ऑयल कंपनियों के ऊपर छोड़ दिया। इसी तरह अक्टूबर 2014 तक डीजल की कीमत भी सरकार निर्धारित करती थी। 19 अक्टूबर 2014 से सरकार ने ये काम भी ऑयल कंपनियों को सौंप दिया।

अभी ऑयल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत, एक्सचेंज रेट, टैक्स, पेट्रोल-डीजल के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और बाकी कई चीजों को ध्यान में रखते हुए रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमत निर्धारित करती हैं।


Share