एनएसए अजीत डोभाल ने दी चेतावनी, ‘पाक के साथ सामान्य रिश्ते चाहते हैं लेकिन अपनी शर्त पर;

NSA Ajit Doval warned, 'Want normal relations with Pak but on its own condition;
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नई दिल्ली (एजेंसी)। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत पड़ोसी देश के साथ सामान्य रिश्ते चाहता है लेकिन ‘आतंकवाद किसी तरह से बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।‘ मंगलवार को समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में डोभाल ने कहा कि 2019 के बाद कश्मीर में मूड बदल गया है। उन्होंने 2019 के पुलवामा हमले की ओर इशारा करते हुए कहा कि कश्मीर में काफी कुछ बदल चुका है। पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के काफिले को पाकिस्तान से जुड़े एक आत्मघाती हमलावर द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद 40 से अधिक भारतीय सैनिकों की मौत हो गई थी। आतंकी पाक स्थित जैश-ए-मोहम्मद आतंकी समूह से जुड़ा था।

उन्होंने कहा, 2019 के बाद कश्मीर के लोगों का मूड और मिजाज पूरी तरह से बदल गया है। लोग अब पाकिस्तान और आतंकवाद के पक्ष में नहीं हैं। अब बंद के आह्वान नहीं होते हैं… शुक्रवार की हड़तालें खत्म हैं… यह सब बंद हो चुका है। कुछ युवा लड़के गुमराह हो रहे हैं। लेकिन हम उन्हें मनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं… कुछ आतंकी संगठन हैं लेकिन हम उनसे पूरे संकल्प के साथ लड़ रहे हैं। पाक के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा, हम सामान्य संबंध चाहते हैं लेकिन आतंकवाद के लिए सहिष्णुता की सीमा बहुत कम है। ऐसा नहीं हो सकता कि जब हमारा विरोधी चाहे तो शांति और जब वो चाहे तो युद्ध हो … हम तय करेंगे कि कब, किसके साथ और किन शर्तों पर क्या करना है।

घाटी में पिछले दिनों कश्मीरी पंडितों और गैर-स्थानीय लोगों की टारगेट किलिंग के सवाल पर डोभाल ने कहा कि सरकार ने अतीत में कदम उठाए हैं, और निश्चित रूप से भविष्य में कमजोर वर्गों की रक्षा के लिए और अधिक कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, सबसे अच्छी बात यह है कि आतंकवादियों के खिलाफ आक्रामक मोड पर जाना और सुनिश्चित करना कि उनका हिसाब-किताब हो। अजीत डोभाल ने चीन के साथ सीमा गतिरोध पर भी टिप्पणी करते हुए कहा, चीन के साथ हमारा लंबे समय से लंबित क्षेत्रीय विवाद है। हमने अपने इरादे बहुत स्पष्ट कर दिए हैं। वे इस तथ्य से अवगत हैं कि हम किसी भी तरह का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं करें। एनएसए ने सरकार की नई सशस्त्र बलों की भर्ती योजना ‘अग्निपथ’ के विरोध पर भी बात करते हुए कहा कि हिंसक और व्यापक विरोध के बावजूद इसे वापस नहीं लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सुरक्षित और मजबूत’ भारत के दृष्टिकोण का हिस्सा है और यह आवश्यक है ताकि देश के सशस्त्र बल भविष्य के युद्धों और संघर्षों के लिए तैयार रहें।


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