अब श्रीनगर से ही अमरनाथ तक मिलेगी हेलिकॉप्टर सेवा, अभी मिलती है पहलगाम और बालटाल से

अब श्रीनगर से ही अमरनाथ तक मिलेगी हेलिकॉप्टर सेवा, अभी मिलती है पहलगाम और बालटाल से
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नई दिल्ली (एजेंसी)।  दो साल बाद शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें श्रीनगर से अमरनाथ तक हेलिकॉप्टर सेवा मिलेगी। गुफा की ओर जाने वाले रास्तों पर यात्रा के दबाव को कम करने के लिए गृह मंत्रालय ने यह बड़ा फैसला लिया है। मंत्रालय ने श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) को श्रीनगर से पंचतरणी के लिए सीधे हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने को कहा है। इससे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। अभी यात्रियों के लिए बालटाल और पहलगाम से पंचतरणी तक हेलिकॉप्टर सेवा उपलब्ध है। दोनों स्थान श्रीनगर से 90 किमी से ज्यादा दूर हैं।

बैठक में लिया गया फैसला

इसके लिए एक नया रास्ता जोड़ा जा रहा है, जो श्रीनगर हवाई अड्डे के पास बडगाम से पंचतरणी तक होगा। अमरनाथ यात्रा में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस बार भी यात्रा में सरकार भारी भीड़ उमडऩे की उम्मीद कर रही है। इसके लिए पिछले हफ्ते एक बैठक हुई थी, जिसमें तय किया गया है कि श्रीनगर से भी यात्रियों को हेलिकॉप्टर सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं।

एसएएसबी को जांच के आदेश दिए गए हैं कि क्या अमरनाथ गुफा की तलहटी में भी हेलिकॉप्टर उतारना संभव होगा। अभी अमरनाथ गुफा के पास सिर्फ वीआईपी को ले जाने वाले हेलिकॉप्टर उतरते हैं। वहीं आम यात्रियों के लिए हेलिकॉप्टर सेवा शुरू होने से श्रद्धालु एक ही दिन में अमरनाथ के दर्शन कर सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार एक दिन में सिर्फ 15,000 पंजीकृत तीर्थयात्रियों को श्री अमरनाथ यात्रा के लिए पहलगाम और बालटाल से आगे जाने की अनुमति है। अमरनाथ यात्रा इस साल 30 जून से शुरू होगी, जो 43 दिनों तक चलेगी। वहीं, खुफिया एजेंसियों के मुताबिक यात्रा में आतंकियों को निशाना बनाए जाने की धमकी मिली है। ऐसे में सुरक्षाबल अलर्ट पर हैं।

स्वर्णिम आभा से दमका श्रीकाशी विश्वनाथ दरबार, वाराणसी (एजेंसी)। श्रीकाशी विश्वनाथ दरबार अब भीतर से बाहर तक स्वर्णिम आभा से दमक उठा है। बाहरी दीवारों पर भी सोना मढऩे का कार्य बुधवार को पूरा कर लिया गया। गर्भगृह की भीतरी दीवार महाशिवरात्रि पर ही स्वर्ण मंडित कर दी गई थीं। दक्षिण भारत के एक कारोबारी ने गर्भगृह को स्वर्ण मंडित कराने का संकल्प लिया था। इसके लिए मंदिर प्रशासन को 60 किलोग्राम सोना दान में दिया था। इससे जनवरी में कार्य शुरू किया गया। इसके लिए पहले प्लास्टिक, फिर तांबे के सांचे बनाए गए। इसके आधार पर नीचे से ऊपर तक सोना मढ़ा गया। इसकी पहली झलक महाशिवरात्रि से पहले प्र.म. के काशी आगमन पर सबके सामने आई थी। पर्व विशेष पर इस स्वर्णिम आभा के बीच श्रद्धालुओं ने बाबा का दर्शन किया था। त्योहारी भीड खत्म होने के बाद दूसरे चरण में बाहरी दीवारों पर सोना मडऩे का कार्य शुरू किया गया। इसमें नई दिल्ली के स्वर्ण कारोबारी की ओर से 12 कारीगर लगाए गए थे। बांस-बल्ली बांध कर आधार तैयार किया गया और पखवारे भर में कार्य पूरा कर लिया गया।  मंदिर प्रशासन के अनुसार गर्भगृह की भीतरी दीवारों को स्वर्ण मंडित करने में 37 किलो सोना लगा। वहीं, चारों द्वार समेत बाहरी दीवारों पर 23 किलोग्राम सोना मढ़ा गया। मंदिर के मुख्य कार्य पालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि गर्भगह और बाहरी दीवारों पर लगे स्वर्ण पत्तरों की सुरक्षा के साथ स्वच्छता की दृष्टि से एक्रेलिक की पारदर्शी शीट लगाई जा रही है।


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