अब प्लाज्मा थैरेपी से होगा कोरोना सिम्प्टोमैटिक मरीजों का उपचार

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अब प्लाज्मा थैरेपी से होगा कोरोना सिम्प्टोमैटिक मरीजों का उपचार
18 से 55 वर्ष का कोई भी पूर्व सिम्प्टोमैटिक मरीज स्वस्थ होने के 28 दिन बाद ब्लड बैंक में डोनेट कर सकता है अपना प्लाज्मा

उदयपुर. नगर संवाददाता & कोरोना संक्रमितों के उपचार के लिए अब उदयपुर में भी प्लाज्मा थैरिपी शुरू हो गई है। इसमें पूर्व में कोरोना संक्रमित पाए गए मरीजों के 28 दिन बाद उनके शरीर में प्लाज्मा निकालकर संक्रमितों के शरीर में प्रवेश करवाकर उपचार किया जाएगा। इसके लिए जो भी पूर्व में कोरोना संक्रमित पाए गए है वे अपना प्लाज्मा अन्य के उपचार के लिए दे सकते है।

जानकारी के अनुसार कोरोना संक्रमितों के लिए केन्द्र और प्रदेश सरकार के निर्देश पर प्लाज्मा थैरिपी से उपचार शुरू कर दिया है। सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी ने बताया कि इस थैरीपी के लिए पूर्व में कोरोना के वे पेशेन्ट जो सिम्प्टोमेटिक थे, जिनमें सर्दी, जुकाम, बुखार और खंासी के लक्ष्ण थे और उपचार के बाद वे ठीक हो गए थे। ठीक 28 दिन बाद उनके रक्त लिया जाएगा और इसमें से प्लाज्मा निकालकर इसे वर्तमान में सिम्प्टोमैटिक मरीज के शरीर में प्रवेश करवाया जाएगा।

पूर्व में संक्रमित आए सिम्प्टोमैटिक मरीज  जो ठीक हो चुका है उसका प्लाज्मा वर्तमान कोरोना के सिम्प्टोमैटिक मरीज के शरीर में प्रवेश करने पर प्लाज्मा कोरोना की दवाई के रूप में काम करेगा और प्लाज्मा अपने आप ही विकसित कर मरीज के बदन में से कोरोना को ठीक करने का काम करेगा।

डॉ खराड़ी ने बताया कि जो भी पूर्व में सिम्प्टोमैटिक मरीज अन्य मरीजों के ठीक होने के लिए अपना प्लाज्मा देना चाहता है उन्हें आरएनटी के ब्लड बैंक में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भागचंद रैगर को 9982839503 पर सम्पर्क करना होगा। जहां पर जांच के बाद रक्त निकाला जाएगा और उसका उपचार कर प्लाज्मा अलग किया जाएगा। इसके लिए प्लाज्मा डोनेट करने वाले की आयु 18 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यहां पर यह विशेष है कि प्लाज्मा से कोरोना का उपचार केवल सिम्प्टोमैटिक मरीज का ही किया जाएगा। एसिम्प्टोमैटिक मरीज का उपचार पूर्व की तरह नार्मल विधि से ही किया जाएगा।


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