अब घर-घर कचरा उठाने का लगेगा 20 रूपए शुल्क

अब घर-घर कचरा उठाने का लगेगा 20 रूपए शुल्क
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उदयपुर। प्रदेश में निकायों का मूल काम ही अपने अधिकार क्षेत्र की सफाई व्यवस्था बनाएं रखना है और निगम इसके लिए भी पैसे वसूलने की तैयारी कर रहा है और इसका प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। इस प्रस्ताव को भाजपा समर्थित कांग्रेस पार्षदों ने अपना पूर्ण समर्थन दिया और जनता की बात को उठाने के बजाए नए-नए सुझाव दे दिए।

किसी भी निकाय का सबसे पहले काम ही क्षेत्र की सफाई व्यवस्था को सुदृढ करना है और यह काम आज से नही बरसों से हो रहा है, लेकिन अब निगम अब प्रति घर कचरा संग्रहण के नाम पर 20 रूपए मासिक वसूल करेगा। हालांकि यह रकम ज्यादा नहीं है लेकिन निगम को यह सोचना चाहिए कि उनका मूल उद्देश्य ही शहर की सफाई व्यवस्था को बनाए रखना है। जो 2 हजार से अधिक सफाई कर्मचारी है और ठेके पर भी कई सफाई कर्मचारी काम कर रहे है। यदि सारा काम ठेके पर लगी कंपनियों द्वारा ही कर लिया जाएगा तो जो सैंकड़ों की संख्या में सफाई कर्मचारी है वे क्या करेंगे। कटारिया ने बड़ी ही चालाकी से इस प्रस्ताव की व्याख्या करते हुए कहा कि सुबह-सुबह जब ऑटो आता है और लोग कचरा डालने जाते है तो कुछ कचरा सड़क पर गिर जाता है। थैलियां उड़ती है, कागज के टुकड़े उड़ते है, जो नाली में चले जाते है और गंदगी ही गदगी जमा हो जाती है। जिससे जानवर हो रहे है। कुछ लोग तो आयड़ नदी मेें कचरा डाल रहे है। शुल्क लगने पर संबंधिक फर्म का कर्मचारी घर से आकर कचरा उठाकर ले जाएगा।

ऐसे में शुल्क लगने के बाद क्या यह सुनिश्चित हो जाएगा कि कचरा संग्रहण करने वाला कर्मचारी इतनी सफाई से कचरा उठाएगा कि कचरा जमीन पर नही गिरेगा। ऐसा लग रहा है कि मानों कचरा उठाने वाला कर्मचारी हाईटेक संसाधनों से लैस होकर आएगा और वह अपनी जान पर खेलकर छोटे से छोटे कचरे को जमीन पर नहीं गिरने देगा, लेकिन विडम्बना यह है कि बोर्ड की बैठक में बैठे कांगे्रसी पार्षद इसका विरोध नहीं कर पाए और भाजपा बोर्ड की सहमति से यह प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया। अब शहरवासियों को प्रतिमाह 20 रूपए कचरा संग्रहण का देना होगा।

नगर निगम आयुक्त कमर चौधरी ने कहा कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, दुकानों, रेस्टोरेंट, होटलों से सफाई शुल्क लिया जाएगा।

ओएफसी केबल के लिए विभिन्न फोन कंपनियां एवं अन्य एजेंसी से किराया वसूलेंगे। कार्यकारी एजेंसी जितने क्षेत्र का उपयोग होगा, क्षेत्र की डीएलसी दरों का 10 प्रतिशत किराया लेंगे।

पोल टू पोल लगने वाली केबल पर भी शुल्क लगाने का प्रस्ताव अगली बैठक में तय होगा।

लघु उद्योगों पर शुल्क के प्रस्ताव पर तय हुआ कि सभी लघु उद्योगों से1000 रुपए प्रतिवर्ष लिया जाएगा। लेकिल बाजार में व्यापार करने वाले सभी व्यापारियों पर भी राज्य सरकार द्वारा 300 रुपए प्रति माह लेने का आदेश जारी किया गया था लेकिन कॉविड 19 की परिस्थिति को देखते हुए इस प्रस्ताव को अगली बैठक तक रोका गया।

जयपुर की तर्ज पर उदयपुर में भी एक हेरिटेज के संरक्षण हेतु कमेटी बानाने पर चर्चा हुई।

केवल 3000 रुपए या उससे अधिक किराया वसूल करने वाली होटलों से प्रति रूम 200 रुपए प्रति बुकिंग करने पर लिया जाएगा। 5000 रुपए के रूम बुकिंग पर 300 रुपया, 10000 की रूम बुकिंग पर 500 रुपया निगम द्वारा लिया जाएगा।

निगम में 22 जे ई एन की आवश्यकता है वहां पर केवल आठ कार्मिक ही कार्य कर रहे हैं। अनुभवी एवं कुशल कार्मिकों को निविदा शर्तों के आधार पर रखेंगे। आईटी एक्सपर्ट टीम भी रखेंगे।


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