अगले माह रास में नहीं रहेगा जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व

अगले माह रास में नहीं रहेगा जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व
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आजाद, मन्हास, मीर और लावे का फरवरी में खत्म हो रहा कार्यकाल

जम्मू-कश्मीर में विस का गठन न होने से फिलहाल संभव नहीं चुनाव

 जम्मू (एजेंसी)। राज्यसभा में जल्द ही जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व खत्म होने जा रहा है। यहां से राज्यसभा के चारों सदस्यों का अगले माह कार्यकाल पूरा हो जाएगा। वहीं, वर्तमान में विधानसभा का गठन न होने से प्रदेश से उच्च सदन के सदस्यों के लिए चुनाव फिलहाल संभव नहीं है। राज्य विधानसभा के लिए परिसीमन चल रहा है। ऐसे में ये पद लंबे समय तक रिक्त रहने वाले हैं।

वर्ष 2015 में हुए चुनाव में जम्मू-कश्मीर से राज्यसभा के चार सदस्य चुने गए थे। उस समय जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी संयुक्त सरकार बनाने की तैयारी में थे और दोनों दल चार में से तीन सीटें जीतने में सफल रहे थे। इनमें पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) दो और भाजपा एक सीट पर काबिज हुई थी।

पीडीपी से फैयाज अहमद मीर और नजीर अहमद लावे चुने गए थे। हालांकि लावे को बाद में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। भाजपा ने शमशेर सिंह मन्हास को राज्यसभा भेजा था। चौथी सीट कांग्रेस के खाते में गई और पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद चुने गए। आजाद फिलहाल राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी हैं। आजाद नेशनल कांफ्रेंस और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से चुनाव जीते थे। फैयाज अहमद मीर (पीडीपी) और शमशेर सिंह मन्हास (भाजपा) का कार्यकाल 10 फरवरी को और गुलाम नबी आजाद और पीडीपी के बागी नजीर अहमद लावे का कार्यकाल 15 फरवरी को खत्म होगा।

अब परिस्थिति एकदम बदली : अगस्त, 2019 में केंद्र ने अनुच्छेद-370 को निरस्त करते हुए जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन कर दिया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश के रूप में अस्तित्व में आए। हालांकि पहले से निर्वाचित राज्यसभा सदस्यों के कार्यकाल को जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम-2019 में संरक्षित किया गया। इस तरह चारों सदस्य जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बावजूद प्रदेश का उच्च सदन में प्रतिनिधित्व करते रहे। फिलहाल नए जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का गठन नहीं हो पाया गया है। ऐसे में चारों सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद जम्मू-कश्मीर से नए राज्यसभा सदस्यों का चुनाव संभव नहीं है।

 जम्मू कश्मीर में विधानसभा का चल रहा परिसीमन : जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए परिसीमन का कार्य चल रहा है। परिसीमन के बाद जम्मू-कश्मीर में विधायकों की संख्या बढ़ जाएगी। पुनर्गठन से पहले जम्मू-कश्मीर में 87 विधायक थे। इनमें 4 विधायक लद्दाख के भी शामिल थे। अब लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश बन चुका है। इनके अलावा 24 सीटें गुलाम कश्मीर के लिए खाली रहती थीं। परिसीमन के बाद जम्मू कश्मीर में विधायकों की संख्या बढ़ाकर 90 कर दी जाएंगी यानी परिसीमन के बाद 7 सीटें बढ़ जाएंगी। इसके अलावा पहले की तरह गुलाम कश्मीर की 24 सीटें खाली रहेंगी।


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